नई दिल्ली। होर्मुज की खाड़ी में ईरान की नाकाबंदी के जवाब में अमेरिका ने अरब सागर में नाकाबंदी की है। उसने ईरान के विरोध के बावजूद नाकाबंदी जारी रखा है और अब अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि व्हाइट हाउस के आदेश के बाद ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी के तहत अमेरिकी नौसेना ने 34 व्यापारिक जहाजों को वापस लौटा दिया है। उन्होंने बताया कि नाकाबंदी लागू होने के बाद समुद्र में निगरानी और सख्ती बढ़ा दी गई है।
अमेरिकी नाकाबंदी के तहत खासतौर पर उन जहाजों पर नजर रखी जा रही है, जो ईरान के बंदरगाहों से जुड़े हैं। अमेरिका और ईरान की इस जिद के चलते होर्मुज की खाड़ी से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। शुक्रवार की खबरों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में वहां से सिर्फ पांच जहाज गुजरे, जबकि पहले रोज औसतन 140 जहाज गुजरते थे। इन जहाजों में एक ईरानी तेल उत्पाद टैंकर भी शामिल था।
इस बीच खबर है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार की रात इस्लामाबाद पहुंचेंगे। बताया जा रहा है कि उनका यह दौरा अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत से जुड़ा हुआ है। इससे पहले अराघची और पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार के बीच फोन पर बातचीत हो चुकी है। इसमें क्षेत्रीय हालात, संघर्षविराम और कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा की गई। असल में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पाकिस्तान के साथ साथ ओमान और रूस के दौरे पर जाएंगे। दोपक्षीय वार्ता के साथ साथ वे ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले को लेकर भी बात करेंगे।
उधर अमेरिकी मीडिया की खबर है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास ईरान में जंग जारी रखने के लिए सात दिन का समय है। उनको 60 दिन के भीतर युद्ध जारी रखने के लिए संसद की मंजूरी लेने की जरुरत है। उन्होंने दो मार्च को संसद को इस हमले की जानकारी दी थी। इस लिहाज से उनको एक मई से पहले संसद की मंजूरी लेनी है। हालांकि इससे पहले राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संविधान के इस प्रावधान का पालन नहीं किया था। सो, राष्ट्रपति ट्रंप भी इससे बच सकते हैं।


