नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होरमुज की खाड़ी से हाथ खींच लेने का संकेत दिया है। उन्होंने नाटो के सदस्य देशों से कहा है कि अगर उनको तेल चाहिए तो वे खुद जाकर होरमुज की खाड़ी से तेल ले लें, अमेरिका इसमें उनकी कोई मदद नहीं करेगा। माना जा रहा है कि ईरान युद्ध में यूरोपीय देशों की मदद नहीं मिलने से नाराज ट्रंप ने अमेरिका को अलग करने का बयान दिया है। उन्होंने साथ ही यह भी कह दिया कि अगर किसी को तेल चाहिए तो वह अमेरिका से खरीद सकता है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को साफ कहा कि अब अमेरिका किसी देश की मदद नहीं करेगा। देशों को खुद ही अपने हालात संभालने होंगे। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खासतौर पर ब्रिटेन को निशाना बनाते हुए एक पोस्ट में कहा कि ब्रिटेन जैसे देश जो होरमुज की खाड़ी से तेल नहीं ले पा रहे हैं, उन्हें अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए क्योंकि अमेरिका के पास इसकी कोई कमी नहीं है।
इसके आगे राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अगर देश चाहें, तो हिम्मत दिखाएं और खुद होरमुज की खाड़ी जाकर तेल ले लें। अमेरिका उनकी मदद के लिए नहीं आएगा, जैसे वे अमेरिका की मदद के लिए नहीं आए। ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि ईरान काफी हद तक कमजोर हो चुका है और सबसे मुश्किल काम पहले ही पूरा हो गया है। अब बाकी देश खुद जाकर अपना तेल ले सकते हैं।
ब्रिटेन की तरह राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उसने अमेरिका के सैन्य विमानों को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की इजाजत नहीं दी। ये विमान इजराइल के लिए सैन्य सामान लेकर जा रहे थे। राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान में मुश्किल काम पहले ही पूरा हो जाने का दावा करने के बावजूद अमेरिकी हमले जारी हैं। ट्रंप खुद भी ईरान पर हमले का वीडियो जारी कर रहे हैं। अमेरिका ने ईरान के इस्फहान शहर में एक बड़े हथियार डिपो पर हवाई हमला किया, जिसकी वीडियो ट्रंप ने जारी की।
अमेरिकी मीडिया ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ रिपोर्ट के मुताबिक, इस्फहान शहर पर सोमवार रात को हमला किया गया। इसके लिए दो हजार पाउंड के बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल हुआ। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि हमला ईरान के हथियार डिपो पर हुआ, जहां बड़ी मात्रा में हथियार और सैन्य सामग्री रखी गई थी। हमले के बाद डिपो में रखे हथियारों में विस्फोट होने से कई धमाके हुए और इलाके में आग के बड़े गुबार उठे।


