नई दिल्ली। ईरान में भले अमेरिका अब भी बम और मिसाइल बरसा रहा है और स्थायी युद्धविराम नहीं हुआ है लेकिन अमेरिका ने फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए ईरान की टीम के खिलाड़ियों को वीजा जारी कर दिया है। गौरतलब है कि इस साल का फीफा वर्ल्ड कप अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में साझा तौर पर आयोजित किया जा रहा है।
बहरहाल, अमेरिका ने ईरान की टीम के खिलाड़ियों को तो वीजा दे दिया है लेकिन टीम के कई सपोर्ट स्टाफ और अधिकारियों को अब तक अमेरिकी वीजा नहीं मिला है। इस पर ईरान ने अमेरिका पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। बताया गया है कि, फुटबॉल महासंघ के महासचिव हेदायत मोम्बेनी और उपाध्यक्ष मेहदी मोहम्मद नबी सहित 14 अधिकारी और सहयोगी स्टाफ अभी भी वीजा का इंतजार कर रहे हैं।
फुटबॉल महासंघ का कहना है कि अधिकारियों और सपोर्ट स्टाफ को वीजा नहीं मिलने से टीम को बराबरी का मौका नहीं मिल रहा है और वह इस मामले को फीफा के सामने उठाएगा। दूसरी ओर अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि सभी खिलाड़ियों, कोच, ट्रेनर और कुछ सपोर्ट स्टाफ को वीजा जारी कर दिया गया है, लेकिन कुछ आवेदनों को मंजूरी नहीं दी गई। ईरानी टीम फिलहाल तुर्किए के अंताल्या में प्रैक्टिस कर रही है और वहां से मेक्सिको रवाना होगी। गौरतलब है कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आयोजन इस बार 11 जून से 19 जुलाई तक अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में होगा। पहली बार यह टूर्नामेंट तीन देशों की मेजबानी में खेला जाएगा। इसमें 48 टीमें हिस्सा लेंगी।
एक तरफ ईरान ने वीजा की शिकायत की है तो साथ ही ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाया है। मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका तनाव कम करने के बजाय अपनी सैन्य कार्रवाई से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि अमेरिका ने सीरिक क्षेत्र और केश्म द्वीप पर ईरान के तटीय रडार और निगरानी केंद्रों पर हमला किया, जो सीजफायर का उल्लंघन है।


