नई दिल्ली। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने दावा किया है कि अमेरिका के अड़ियल रवैए की वजह से इस्लामाबाद में वार्ता विफल रही। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ फोन पर बातचीत में उन्होंने यह दावा किया। इस बीच खबर है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर इस हफ्ते फिर बैठक हो सकती है, इस्लामाबाद और जेनेवा संभावित जगह मानी जा रही हैं।
हालांकि इस बीच ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह बातचीत के बजाय अपनी शर्तें थोपना चाहता है और शुरुआत से ही भरोसे के लायक नहीं रहा है। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी इरना के मुताबिक अमेरिका के साथ इस्लामाबाद में सीजफायर वार्ता होगी या नहीं इस पर कुछ भी तय नहीं है। वहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के अधिकारी आपस में दूसरी बैठक को लेकर बात कर रहे हैं। यह बैठक 21 अप्रैल से पहले हो सकती है।
उधर कतर ने कहा है कि अभी होर्मुज संकट के हल पर बात करना जल्दबाजी होगी, सबसे पहले सीजफायर पर ध्यान देना चाहिए। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अल अंसारी ने कहा कि इस रास्ते पर पहले कभी कोई बड़ी समस्या नहीं रही है, इसलिए अभी फोकस सुरक्षित आवाजाही पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस युद्ध का असर पूरी दुनिया में ऊर्जा की कीमतों पर पड़ रहा है।
इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि अमेरिका के सख्त रवैए की वजह से इस्लामाबाद में हुई बातचीत किसी समझौते तक नहीं पहुंच पाई। पेजेशकियान ने कहा कि धमकी, दबाव और सैन्य कार्रवाई से हालात और खराब होंगे। समस्याओं का हल बातचीत से ही निकल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय कानून मानने के लिए समझा सकता है और इसमें अहम भूमिका निभा सकता है।
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