अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में कमी आने के बीच चीन ने अपना टैक्स कलेक्शन बढ़ाने के लिए नया कदम उठाया है। इसके तहत अब ई-कॉमर्स कंपनियां सरकारी एजेंसियों के साथ अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद विक्रेताओं का डेटा शेयर कर रही हैं। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया कि नया कानून अक्टूबर से लागू हो चुका है और अलीबाबा, शीन और अमेजन जैसी कंपनियां सरकारी एजेंसियों के साथ विक्रेताओं का डेटा शेयर करना शुरू कर चुकी हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस जानकारी में मर्चेंट का नाम, ऑर्डर, बिक्री के आंकड़े, मुनाफा और वर्चुअल गिफ्ट और डिजिटल टोकन के जरिए होने वाली आय आदि शामिल है।
अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का असर दिखना शुरू हो गया है। स्टेट टेक्सेशन एडमिनिस्ट्रेशन के निदेशक लियान किफेंग के अनुसार, तीसरी तिमाही के अंत तक 7,000 से अधिक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने कर संबंधी आंकड़े जमा कर दिए थे।
दिसंबर में एक ब्रीफिंग में बोलते हुए, लियान ने कहा कि इससे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से प्राप्त कर आय में तीसरी तिमाही में पिछले वर्ष की तुलना में 12.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, हालांकि उन्होंने कुल एकत्रित राशि का खुलासा नहीं किया।
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नया बदलाव ऐसे समय पर आया है, जब चीन की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर दशकों के सबसे निचले स्तर पर है। इसकी वजह अमेरिकी टैरिफ, प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट होना है।
कर वसूली को मजबूत करने के लिए, स्टेट टेक्सेशन एडमिनिस्ट्रेशन ने कई अन्य अभियान शुरू किए हैं।
इनमें निवेशकों को वैश्विक पूंजीगत लाभ पर 20 प्रतिशत कर का भुगतान करने के लिए बाध्य करना, औद्योगिक क्षमता से अधिक उत्पादन को बढ़ावा देने वाले क्षेत्रों में कर छूटों में कटौती करना और धोखाधड़ी से कर छूट का दावा करने के लिए बिलों में हेराफेरी करने वाली कंपनियों पर नकेल कसना शामिल है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2024 में भौतिक वस्तुओं की ऑनलाइन बिक्री 12.8 ट्रिलियन आरएमबी (1.8 ट्रिलियन डॉलर) तक पहुंच गई, जो चीन की कुल खुदरा बिक्री का लगभग 27 प्रतिशत है।
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