दक्षिण-पश्चिमी जापान के ग्रामीण इलाकों में शक्तिशाली भूकंप के दो दिन बाद भी जनजीवन सामान्य नहीं हो सका है। भूकंप के कारण एक शॉपिंग मॉल में विस्फोट हुआ, एक कारखाने की चिमनी गिर गई और कई मकान ढह गए और अब तक कम से कम 23 लोगों की मौत हो चुकी है।
बचाव दल जापान के दक्षिणी मुख्य द्वीप क्यूशू के कुमामोतो क्षेत्र में लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं, जहां मंगलवार को रिक्टर पैमाने पर 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। समय के साथ मलबे में फंसे जीवित लोगों के मिलने की उम्मीद लगातार कम होती जा रही है।
कुमामोतो प्रांतीय सरकार के अनुसार, अब भी लापता लोगों की संख्या स्पष्ट नहीं है। भूकंप में कम से कम 63 लोग घायल हुए हैं, जिनमें पांच की हालत गंभीर है।
मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा कि पुलिस के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, मृतकों की संख्या 28 है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इनमें कुछ ऐसे मामले भी शामिल हैं जिनकी जांच जारी है और संभव है की ये भूकंप से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित नहीं हो।
जीवित बचे लोगों ने बताया कि वे घर लौटने के बाद मलबे में दबे अपने परिजनों को निकालने के लिए हरसंभव प्रयास करते रहे। कई लोग घायल भी हुए, जिन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।
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हजारों लोगों ने एक और रात राहत शिविरों में बिताई। ये शिविर स्कूलों के व्यायामशालाओं और अन्य बड़े भवनों में स्थापित किए गए हैं। कई घरों में अब भी बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। लोग लगातार आ रहे झटकों के डर से घर लौटने से बच रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, करीब 23,000 घरों की बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की जा सकी है और 400 के आसपास राहत शिविरों में 10,000 से अधिक लोग रह रहे हैं। शिविरों में लोगों को गर्मी से राहत देने के लिए अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था की जा रही है ताकि वातानुकूलन की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
भीषण गर्मी के कारण लोगों के बीमार पड़ने की आशंका भी बढ़ गई है। पर्यावरण मंत्रालय ने कुमामोतो क्षेत्र में भीषण गर्मी की चेतावनी जारी की है। बृहस्पतिवार को वहां तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है।
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हिकावा कस्बे में कई लोग अब भी पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। कुछ लोग उद्यानों और पार्किंग स्थल में अपने वाहनों में ही रह रहे हैं।
नगर कार्यालय के बाहर अधिकारियों ने लोगों को बोतलबंद पानी और पैकेटबंद चावल वितरित किए, जबकि जापान के जमीनी आत्मरक्षा बल के जवान ट्रॉली के जरिए पेयजल उपलब्ध करा रहे हैं।
हिकावा के 66 वर्षीय निवासी योशिआकी नाकाशिमा ने बताया कि वह अपने पालतू कुत्ते के साथ पानी लेने आए हैं और राहत शिविर में रहने के बजाय अपनी कार में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार आ रहे झटकों के कारण उन्हें अपने घर में सोने से भी डर लग रहा है।
Pic Credit : ANI
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