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चीन, योरोप भी तो ट्रंप को हैंडल कर रहे

टैरिफ

ऐसा लग रहा है कि पूरी दुनिया में इस समय सबसे बड़ी चिंता यह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कैसे हैंडल करें। सब अपने अपने तरीके बता रहे हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों उनके बहुत गहरे दोस्त हैं। इसके बाद उन्होंने कहा कि वे मोदी को बताएंगे कि ट्रंप को कैसे हैंडल करें। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह बात मीडिया के जरिए नहीं, बल्कि निजी बातचीत में बताएंगे कि कैसे ट्रंप को हैंडल करें। सोचें, एक राष्ट्र का प्रधानमंत्री दूसरे देश के प्रधानमंत्री को बताएगा कि एक तीसरे देश के राष्ट्रपति को कैसे हैंडल किया जाएगा। पहले कभी इस किस्म की बात सुनने को नहीं मिली।

इसी तरह जिस समय नेतन्याहू ने यह बात कही लगभग उसी समय ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया था। लूला और प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत का मुद्दा यह था कि राष्ट्रपति ट्रंप को कैसे हैंडल करें। ध्यान रहे राष्ट्रपति ट्रंप ने कुछ दिन पहले कहा था कि लूला डी सिल्वा जब कहें तब वे उनसे बात करने को तैयार हैं। लेकिन लूला ने कहा कि वे ट्रंप से नहीं मोदी से बात करें। माना जा रहा है कि ब्राजील के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री दोनों ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से निपटने या उनको हैंडल करने के बारे में बात की। दोनों की एक रणनीति दिख रही है कि अभी ट्रंप के दबाव के  आगे नहीं झुकना है और अभी चुप रहना है। हो सकता है कि ट्रंप को हैंडल करने की यह रणनीति उससे अलग हो जो नेतन्याहू ने मोदी को बताने का वादा किया है।

बहरहाल, इस महीने के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के दौरे पर जा सकते हैं, जहां शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ की बैठक से इतर उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग से दोपक्षीय वार्ता हो सकती है। एससीओ सम्मेलन के दौरान चीन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी मोदी को मिलेंगे। बाद में पुतिन भारत के दौरे पर भी आने वाले हैं। माना जा रहा है कि चीन में राष्ट्रपति शी जिनफिंग, राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी इस बात पर विचार करेंगे कि ट्रंप को कैसे हैंडल किया जाए। वैसे जिनफिंग और पुतिन ने अपने हिसाब से हैंडल किया हुआ है।

राष्ट्रपति ट्रंप चीन पर टैरिफ नहीं बढ़ा रहे हैं, जबकि वह रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीद रहा है। लेकिन उससे कम तेल खरीदने वाले भारत पर उन्होंने 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। हो सकता है कि जिनफिंग समझाएं मोदी को कि उन्होंने कैसे यह किया है। वैसे यह सिर्फ भारत, चीन, रूस या ब्राजील का मामला नहीं है। यूरोपीय संघ के नेता भी इस फिक्र में हैं कि ट्रंप को कैसे हैंडल करें तो जापान और दक्षिण कोरिया के नेता भी परेशान हैं। मेक्सिको और कनाडा वाले तो पहले से ही परेशान हैं।

By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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