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जनता संकट महसूस कर रही है

भारत में तेल और गैस का संकट वास्तविक है। देश के हर हिस्से में नागरिक इसे अपनी तरह से महसूस कर रहे हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से रोज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो कहा जा रहा है वह असलियत नहीं है। इसलिए चाहे प्रधानमंत्री हों या उनके मंत्री या उनके अधिकारी सबको जनता पर दोष डालना बंद करना चाहिए। जिस दिन से पश्चिम एशिया में जंग शुरू हुई है और परेशान लोग रसोई गैस सिलेंडर के लिए भटक रहे हैं उस दिन से सरकार कह रही है कि तेल और गैस की कोई कमी नहीं है और जनता पैनिक बाइंग कर रही है। कोई बेहद असंवेदनशील व्यवस्था ही ऐसी बात कह सकती है, जिसको जमीनी वास्तविकता का अंदाजा नहीं हो या जिसको झूठ बोल कर अपना नैरेटिव स्थापित करना हो। सवाल है कि देश के अलग अलग हिस्सों से जो खबरें आ रही हैं या जो तस्वीरें और वीडियोज सामने आ रही हें उन पर यकीन किया जाए या सरकार जो कह रही है उसको माना जाए?

अगर सरकार कह रही है कि तेल और गैस की कोई कमी नहीं है और जितने सिलेंडर की आपूर्ति पहले होती थी उतनी ही अभी भी हो रही है, फिर भी लोग सुबह चार बजे से गैस एजेंसियों के सामने कतार लगा कर खड़े हो रहे हैं तो इसका अर्थ है कि सरकार जो कह रही है उस पर किसी को यकीन नहीं है। यकीन होता तो ऐसा नहीं होता। लोगों को सरकार की बातों पर भरोसा नहीं है। दूसरी बात यह है कि वास्तव में तेल और गैस की किल्लत हो गई है। एक तो गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है और दूसरी बात यह है कि कालाबाजारी भी बढ़ी है। स्थानीय प्रशासन की देखरेख में जम कर कालाबाजारी हो रही है। विपक्षी पार्टियों के शासन वाले राज्यों में अलग संकट है। वहां लोग ज्यादा परेशान हैं क्योंकि यह धारणा बन गई कि विपक्षी शासन वाले राज्यों में केंद्र सरकार पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति कम रखेगी।

अब तो सरकार ने सफाई दी है कि पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों ने उधार का समय एक से बढ़ा कर तीन दिन कर दिया है। इससे पहले खबर आई थी कि पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों ने क्रेडिट देना बंद कर दिया है, जिससे गांवों, कस्बों के छोटे पेट्रोल पंप का स्टॉक खाली हो रहा है और वे नया स्टॉक नहीं ले पा रहे हैं। इससे गांवों या कस्बों के आसपास के शहरों में बड़े पेट्रोल पंप्स पर अचानक भीड़ उमड़ पड़ी। इस बीच यह अफवाह फैली की देश में सिर्फ छह दिन का पेट्रोल और गैस भंडार है। इससे पैनिक और बढ़ा। प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात के कई शहरों के वीडियो लोगों ने शेयर किए, जिसमें बाइक, स्कूटी से लेकर छोटी, बड़ी गाड़ियों की लंबी कतारें दिख रही हैं। लोग घंटे लाइन में लग रहे हैं। पेट्रोल, डीजल के साथ साथ रसोई गैस और सीएनजी के लिए भी लाइनें लग रही हैं। लॉकडाउन लगने की अफवाहों ने इसे और बढ़ा दिया।

लॉकडाउन की अफवाह भी अनायास नहीं फैलीं। पहले तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के दोनों सदनों में दिए गए भाषण में बार बार कहा कि जब कोरोना जैसी महामारी से निपट लिए तो भारत इससे भी निपट लेगा। इससे लोगों को लगा कि हालात कोरोना की महामारी जैसे हो गए हैं। इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी कह दिया कि हालात कोरोना की महामारी जैसे हो सकते हैं। इससे लॉकडाउन लगने, पेट्रोल व डीजल की राशनिंग होने आदि की खबरें तेजी से फैलीं।

By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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