यूक्रेन के छह और अमेरिका के एक नागरिक का भारत में गिरफ्तार होना और आतंकवादी साजिश रचने के आरोप में उनके ऊपर मुकदमा दर्ज होना मामूली बात नहीं है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने उनके ऊपर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून यानी यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज किया है। साथ ही यूएपीए की धारा 18 भी लगाई गई है, जो आतंकवादी साजिश रचने की धारा है। जिस अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया गया है उसका नाम मैथ्यू आर्थर वैन डाइक है। वह सीरिया और लीबिया में वहां के उग्रवादी समूहों की ओर से लड़ चुका है और वहां के तख्तापलट की मुहिम का हिस्सा रहा है। उसे हथियारों की आपूर्ति के साथ साथ उनका प्रशिक्षण देने का व्यापक अनुभव है। कहा जा रहा है कि वह यूक्रेन में भी लड़ रहा था और वहां से छह यूक्रेनी लोगों के साथ वह टूरिस्ट वीजा पर भारत आया और लंबी यात्रा करके, सारी सुरक्षा बाधाओं को पार करके पूर्वोत्तर पहुंचा और वहां से म्यांमार की सीमा में चला गया।
यह भारत की पूरी सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाली घटना है। ड्रोन्स और अन्य हथियार सप्लाई करने के लिए सात लोग पूर्वोत्तर तक गए और वहां से मणिपुर और मिजोरम के उन इलाकों में गए, जहां जाने के लिए रेस्ट्रिक्टेड एरिया पास लेना होता है। बिना पास के ये लोग वहां गए और वहां से म्यांमार की सीमा में गए और उसके बाद बड़ी आसानी से वापस भी भारत की सीमा में लौटे और फिर देश के अलग अलग हिस्सों में चले गए। बताया जा रहा है कि इन लोगों ने म्यांमार में चिन उग्रवादी समूहों को मदद पहुंचाने गए थे। चिन उग्रवादी समूह म्यांमार में जो लड़ाई लड़ रहे हैं वह अपनी जगह लेकिन इन समूहों का प्रत्यक्ष संबंध भारत के उग्रवादी समूहों खास कर उल्फा, एनएससीएन के किसी खास समूह और कुकी समूहों के साथ रहा है। सोचें, यह भारत की सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा है। वैसे भी म्यामार की अस्थिरता के कारण उग्रवादी भारत की सीमा में आ रहे हैं और बड़ी संख्या में शरणार्थी भी भारत आ रहे हैं। ऐसे में किसी भी बाहरी मदद से भारत की सीमा के नजदीक अगर उग्रवादी गतिविधियों में बढ़ोतरी होती है तो सोच सकते हैं कि भारत को उसका कितना बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों की तमाम विफलता के बाद किसी तरह से एनआईए को सुराग मिला और उसने सात लोगों को गिरफ्तार किया। इसमें अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आर्थर वैन डाइक को कलकत्ता हवाईअड्डे से गिरफ्तार किया गया। यूक्रेन के तीन नागरिक दिल्ली और तीन लखनऊ हवाईअड्डे पर गिरफ्तार हुए। इनको अदालत ने एनआईए की हिरासत में भेजा और इनसे पूछताछ हो रही है। इस पूरे घटनाक्रम का एक सबक तो यह है कि भारत की सुरक्षा एजेंसियों को ज्यादा अलर्ट रहने की जरुरत है क्योंकि दूसरे देशों से आकर लोग हजारों मील की यात्रा करके, हथियार और ड्रोन के साथ ऐसी जगह पहुंच जाते हैं, जहां जाने के लिए अलग से परमिट की जरुरत होती है। दूसरा सबक यह है कि भारत सीमा पर चौकसी बढ़ाए क्योंकि ऐसा लग रहा है कि पश्चिमी ताकतों की प्रॉक्सी लड़ाई भारत की सीमा तक या भारत के बैकयार्ड यानी पिछवाड़े तक पहुंच गई है। यह किसी से छिपा नहीं है कि अमेरिका चाहता है कि म्यांमार में सैनिक जुंटा का तख्ता पलट हो। इसके लिए वह राखाइन प्रांत में लड़ रही अराकान आर्मी को मदद भेजता है। लेकिन उसकी ऐसी किसी भी कोशिश में भारत का इस्तेमाल कॉरिडोर की तरह नहीं किया जा सकता है। इससे भारत के सामने बड़ा कूटनीतिक और सामरिक सवाल खड़ा होगा और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा होगा। इस घटना के बाद भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल से मुलाकात हुई है। उम्मीद करनी चाहिए कि भारत ने विरोध जताया होगा।


