असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलमीन यानी एआईएमआईएम ने उत्तर प्रदेश में अपना काम शुरू कर दिया है। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में पार्टी कुछ खास नहीं कर पाई क्योंकि चुनाव से ऐन पहले हुमायूं कबीर का एक स्टिंग वीडियो वायरल हो गया, जिसमें वे कह रहे थे कि कह रहे थे कि भाजपा के साथ उनकी डील हो गई है और वे भाजपा के कहने पर वोट काट रहे हैं। उन्होंने कई सौ करोड़ रुपए मे डील होने की बात कही थी। हालांकि सैकड़ों करोड़ रुपए की बात होने के बावजूद ईडी ने उनकी जांच नहीं की। लेकिन उनके स्टिंग वीडियो के बाद ओवैसी ने उनसे तालमेल खत्म कर लिया। कुछ सीटों पर उनकी पार्टी लड़ी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
अब उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले ओवैसी की पार्टी ने अपना अभियान शुरू किया है। इस बार बहराइच से अभियान शुरू हुआ है और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को निशाना बनाया गया है। ओवैसी की रैली से पहले ही सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह का विवाद शुरू हो गया। उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने कहा है कि सुहेलदेव कोई राजा नहीं थे, राजा होते तो बहराइच में कोई किला होता। उन्होंने यहां तक कहा कि सुहेलदेव की पूरी कहानी काल्पनिक है। दूसरी ओर अनिल राजभर का कहना है कि गाजी की दरगाह सूर्य कुंड है और इसलिए दरगाह को तोड़ देना चाहिए। ध्यान रहे ओमप्रकाश राजभर और उनकी पार्टी का दावा है कि राजा सुहेलदेव ने मसूद गाजी को सेना को हराया था। शौकत अली और अनिल राजभर के विवाद से जो ध्रुवीकऱण होगा, उससे भाजपा को फायदा होगा और अखिलेश यादव का पीडीए वाले खेल बिगड़ेगा।
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