प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों या मंत्रियों के शपथ का एक क्रम होता है। मंत्री पहले पद की शपथ लेते हैं और उसके बाद गोपनीयता की शपथ दिलाई जाती है। ये दोनों साथ साथ ही होते हैं लेकिन इनका एक क्रम है। वह क्रम इसलिए है क्योंकि जब तक पद की शपथ नहीं लेंगे तब तक गोपनीयता की शपथ का कोई मतलब नहीं होगा। पद मिलेगा तभी गोपनीयता बरतने की अपेक्षा की जाएगी। लेकिन पश्चिम बंगाल में जब राज्यपाल आरएन रवि शुभेंदु अधिकारी और उनके मंत्रियों को शपथ दिला रहे थे तब एक मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने उलटी शपथ ली। पहले उन्होंने गोपनीयता की शपथ पढ़नी शुरू कर दी और बाद में उनको पद की शपथ दिलाई गई।
वे फैशन डिजाइनर थीं और बाद में राजनीति में सक्रिय हुईं। उनको शुभेंदु अधिकारी का करीबी माना जाता था और एक समय प्रदेश अध्यक्ष बनने की भी चर्चा थी। इसके बावजूद उनको समझ नहीं आया कि पहले पद की शपथ लेनी है। उससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि नियमों के प्रति बेहद सख्त रुख रखने वाले राज्यपाल महोदय आरएन रवि ने अग्निमित्रा पॉल को टोका तक नहीं। वे चुपचाप खड़े रहे और मंत्री को पद की शपथ लेने से पहले ही गोपनीयता की शपथ लेते देखते रहे। बाद में पद की शपथ दिलाई। इस चीज का सोशल मीडिया में बहुत मजाक बना। ऐसा लग रहा है कि आरएन रवि का नियमों के प्रति सख्ती का रुख सिर्फ तमिलनाडु तक था, जहां भाजपा विरोधी पार्टी की सरकार थी। बंगाल में भाजपा की सरकार है और भाजपा के मंत्रियों के लिए राज्यपाल महोदय नियमों की परवाह छोड़ सकते हैं।
वैसे तमिलनाडु में जो नए राज्यपाल हैं वे भी काफी सख्त हैं। शपथ के बीच जब विजय ने कुछ और बोलना शुरू किया तो राज्यपाल ने उनको तत्काल टोक दिया था। सोचें, तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने मुख्यमंत्री को टोक दिया। लेकिन आरएन रवि साहब शपथ का क्रम गलत होने पर भी एक मंत्री को नहीं टोक पाए। फर्क इतना है कि मुख्यमंत्री भाजपा विरोधी पार्टी का है और मंत्री भाजपा की हैं।


