बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट का नतीजा चाहे जो हो पर इतना कहा जा सकता है कि भाजपा को सबसे ज्यादा चिंता प्रशांत किशोर की सता रही है। सबसे पहले तो इस चिंता का पता तब चला, जब दूसरे कई राज्यों को छोड़ कर आनन फानन में बांकीपुर उपचुनाव का ऐलान हुआ है। साथ में मध्य प्रदेश और गुजरात की एक एक सीट पर भी उपचुनाव हो रहा है। लेकिन अगर बांकीपुर जल्दी नहीं कराना होता तो उसे भी टाला जा सकता था। चूंकि अकेले बांकीपुर कराते तो मैसेज अलग जाता इसलिए दो सीट और जोड़ दिए। लेकिन पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु आदि राज्यों की सीटों पर उपचुनाव नहीं कराया। ऐसा इसलिए हुआ ताकि प्रशांत किशोर को तैयारी का ज्यादा समय न मिले।
प्रशांत किशोर की भाजपा को कैसे चिंता है यह उम्मीदवार की घोषणा में भी दिखा। भाजपा ने पार्टी के एक कार्यकर्ता और भारतीय जनता युवा मोर्चा के अभिषेक सिन्हा को उम्मीदवार बनाया। वे कायस्थ समाज से आते हैं। बांकीपुर सीट पर पिछले नौ चुनाव से नितिन नबीन या उनके पिता नबीन किशोर सिन्हा जीते हैं। इस सीट पर तीन अन्य कायस्थ नेताओं अजय आलोक, रितुराज सिन्हा और आशीष सिन्हा के नाम की चर्चा चल रही थी। समस्या यह थी कि आरके सिन्हा, अरुण सिन्हा और गोपाल प्रसाद के बेटों में से किसी को टिकट मिलती तो प्रशांत किशोर तुरंत वंशवाद का मुद्दा उठा देते। वे इसकी तैयारी कर रहे थे। वे लगातार भाजपा के अंदर परिवारवाद का मुद्दा उठाते रहते हैं। इसलिए भाजपा ने सावधानी बरती और अभिषेक सिन्हा को टिकट दिया।
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