बिहार विधानसभा चुनाव के बाद जिस तरह का घटनाक्रम हुआ उससे लग रहा था कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी संकट में है। उनके सिर्फ चार विधायक जीते थे, जिसमें उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा भी थीं। उनको एक मंत्री पद का कोटा मिला तो लग रहा था कि वे पत्नी को मंत्री बनाएंगे। लेकिन उन्होंने बिना विधायक हुए अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बना दिया। उनको एक एमएलसी का कोटा मिला है। वे अपने बेटे को एमएलसी बनाएंगे। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी में बड़ी नाराजगी हुई। उनके तीन विधायकों ने दूरी बना ली और अलग बैठकें करने लगे। लगा कि पार्टी टूट जाएगी और उनके पास सिर्फ बेटा और पत्नी बचेंगे।
लेकिन अब लग रहा है कि भाजपा और जनता दल यू की मदद से सब कुछ ठीक हो गया है। तीन में दो विधायक उनके पास वापस लौट आए हैं। इतना ही नहीं उन्होंने पार्टी को एकजुट रखने का बड़ा दांव चला है। उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी के राजपूत विधायक आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है। इस मौके पर दूसरे नाराज विधायक माधव आनंद भी मौजूद थे। ध्यान रहे लोकसभा चुनाव में जब कुशवाहा मुश्किल लड़ाई में फंसे थे तब भी आलोक सिंह उनके साथ खड़े थे। उस समय राजपूत समुदाय पवन सिंह का समर्थन कर रहा था। सो, आलोक सिंह को प्रदेश की कमान देकर उपेंद्र कुशवाहा ने शाहाबाद इलाके में अपना वोट कंसोलिडेट किया है और पार्टी को भी सुरक्षित किया है। हालांकि यह पता नहीं है कि सहयोगी पार्टी के नाते भाजपा और जदयू ने उनको मदद की है और उनके विधायकों को अपने साथ नहीं लिया या इसकी कीमत राज्यसभा सीट के रूप में चुकानी होगी?
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