यह कमाल की बात है कि विशुद्ध निकम्मेपन की वजह से धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा हुआ है लेकिन भाजपा के नेता उनको महान और कर्मठ नेता व मंत्री साबित करने पर तुले हैं। छात्रों और युवाओं ने देश भर में आंदोलन करके सरकार की बांह मरोड़ी तब जाकर प्रधान ने इस्तीफा दिया। लेकिन भाजपा के नेता यह साबित करने में लगे हैं कि प्रधान ने स्वेच्छा से और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस्तीफा दिया। ऐसा लग रहा है कि भाजपा की ओर से इस मामले में नैरेटिव बनाने की रणनीति पहले से बनी हुई थी और सारे नेता प्रधान के इस्तीफे के बाद एकदम सक्रिय हो गए। इसका यह भी अर्थ है कि पार्टी के शीर्ष दोनों नेताओं की पूरी सहानुभूति उनके साथ है।
तभी यह दावा किया जा रहा है कि उनका राजनीतिक करियर अभी खत्म नहीं हुआ है। बहरहाल, उनके तारीफ की कमान खुद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने संभाली। नितिन नबीन ने सोशल मीडिया में पोस्ट लिख कर धर्मेंद्र प्रधान की भूरि भूरि प्रशंसा की। उनकी प्रशासनिक योग्यता, शिक्षा के प्रति उनके समर्पण, नई शिक्षा नीति को लागू करने में उनकी भूमिका, पार्टी के विकास और उसे मजबूत बनाने में उनके योगदान आदि की जम कर तारीफ हुई। बिहार सरकार के मंत्री विजय सिन्हा और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह ने बड़े भावुकता और आत्मीयता के साथ सोशल मीडिया पोस्ट लिखी और बयान जारी किया, जिसमें प्रधान को महान बताया गया। मौजूदा एनडीए में इस्तीफे नहीं होते हैं, का जुमला बोलने वाले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दिखाता है कि भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उच्च नैतिक मूल्यों पर चलने वाले हैं।
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