भाजपा के जानकार नेताओं का कहना है कि संसदीय बोर्ड में शामिल होने के लिए दो मुख्यमंत्रियों में होड़ है। ध्यान रहे अभी कोई भी सीएम संसदीय बोर्ड का सदस्य नहीं है। एक समय मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री रहते शिवराज सिंह चौहान को संसदीय बोर्ड में रखा गया था। अब कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस संसदीय बोर्ड में शामिल होने के प्रयास में लगे हैं। संसदीय बोर्ड में शामिल होने से उनका कद बढ़ेगा और राष्ट्रीय नेतृत्व के रूप में स्वीकृति मिलेगी। ध्यान रहे दोनों मुख्यमंत्री अपने को प्रधानमंत्री पद का दावेदार मानते हैं।
लेकिन सवाल है कि क्या सीएम रहते दोनों को संसदीय बोर्ड में लाया जाएगा या सीएम पद छोड़ कर आने को कहा जाएगा? पिछले दिनों बारी बारी से दोनों सीएम प्रधानमंत्री से मिले हैं। पहले योगी आदित्यनाथ की मुलाकात हुई और उसके बाद फड़नवीस मिले। फड़नवीस की मुलाकात के बाद तो यह चर्चा शुरू हो गई कि उनको केंद्र में शिक्षा मंत्री बनाया जा सकता है। यह भी कहा गया कि केंद्र में मंत्री बना कर उनको संसदीय बोर्ड का सदस्य बनाया जाएगा। हालांकि योगी और फड़नवीस दोनों सीएम रहते संसदीय बोर्ड में जगह चाहते हैं। केंद्रीय मंत्रियों में शिवराज सिंह चौहान को प्रबल दावेदार माना जा रहा है। अगर सोनोवाल बोर्ड में रह जाते हैं तो एसटी समुदाय का कोटा हो जाएगा। तब एक दलित, एक ओबीसी और एक महिला की जगह रहेगी।
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