करीब डेढ़ दशक के बाद कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में महिला प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। पहला प्रयोग बहुत कामयाब नहीं रहा था। 2007 से 2012 तक रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस की अध्यक्ष थीं। बाद में वे समाजवादी पार्टी से होते हुए भाजपा में चली गईं। इसके बाद कांग्रेस ने 2017 के चुनाव में भी शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बना कर चुनाव लड़ने की तैयारी की। जुलाई 2016 में उनके नाम की घोषणा भी हो गई थी। हालांकि बाद में समाजवादी पार्टी के साथ तालमेल हो गया तो इस योजना को स्थगित कर दिया गया। फिर भी इसमें कोई दो राय नहीं है कि महिला और ब्राह्मण प्रदेश अध्यक्ष बनाने की एक असर उत्तर प्रदेश में हो सकता है।
कांग्रेस यह दावा कर सकती है कि वह महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने और बड़ी जिम्मेदारी देने वाली पार्टी है। इसके अलावा कांग्रेस को इसका एक लाभ यह होगा कि समाजवादी पार्टी से तालमेल की बातचीत अपेक्षाकृत आसान हो जाएगी। अजय राय के रहते यह मुश्किल लग रहा था। ध्यान रहे अजय राय सड़क से लेकर अदालत और जनता की अदालत तक में संघर्ष करने वाले नेता हैं। उन्होंने पिछले चुनाव में वाराणसी सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पसीने छुड़ा दिए थे। दूसरी ओर आराधना मिश्र उर्फ मोना मिश्र की एक नेता से ज्यादा बड़ी पहचान यह है कि वे प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। प्रमोद तिवारी भी सड़क पर संघर्ष करने वाले नेता नहीं हैं। लेकिन यह जरूर है कि वे अखिलेश यादव के साथ तालमेल कराने में मददगार होंगे। 26 अगस्त को प्रमोद तिवारी और मोना मिश्रा अखिलेश यादव से मिलने गए थे। लगता है उस समय फैसला हो गया था।
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