भारतीय जनता पार्टी अब दूसरी तरह से लोगों को चौंका रही है। वह मजबूत क्षत्रप नेताओं को राज्यों में कमान दे रही है। बिहार में सम्राट चौधरी और पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाया गया। असम में हिमंत बिस्वा सरमा ही फिर से सीएम बनेंगे यह लगभग तय है। असल में पहले भाजपा के बारे में यह धारणा बनी थी कि वह किसी को भी मुख्यमंत्री बना सकती है। कहा जाने लगा था कि भाजपा पर्ची से निकाल कर सीएम के नाम तय कर रही है। राजस्थान में भजनलाल शर्मा और मध्य प्रदेश में मोहन यादव को सीएम बनाए जाने के बाद यह धारणा बनी थी। ओडिशा में भी भाजपा ने दिग्गज नेताओं को छोड़ कर मोहन चरण मांझी को बनाया और छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय को कमान सौंपी। उत्तर भारत में सबसे पहले इसकी शुरुआत तब हुई थी जब भाजपा मे हिमाचल प्रदेश में जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री बनाया था।
भाजपा के बारे में बनी इस धारणा के कारण ही जब बिहार में उसका अपना सीएम बनाने की बारी आई तो ज्यादातर लोग कह रहे थे कि कोई चौंकाने वाला नाम होगा। भाजपा किसी को भी मुख्यमंत्री बना सकती है। सम्राट चौधरी के नाम को सिर्फ इस आधार पर खारिज किया जा रहा था कि उनके नाम की बहुत चर्चा हो रही है तो नरेंद्र मोदी और अमित शाह उनको नहीं बनाएंगे। लेकिन अंततः उनके नाम पर मुहर लगी। कोई चौंकाने वाला नहीं आया। कोई पर्ची नहीं निकली। उसके बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी जीत मिली और पहला मुख्यमंत्री बनाने की बात आई तो शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे था। लेकिन ऐसा कहने और मानने वाले बहुत से लोग थे कि उनके नाम की बहुत चर्चा हो रही तो वे नहीं बनेंगे। यह भी कहा जा रहा था कि भाजपा को अपने दम पर पूर्ण बहुमत मिला है और पहला मुख्यमंत्री बनना है तो पार्टी आरएसएस की पृष्ठभूमि वाले किसी पुराने नेता को मौका देगी। लेकिन बंगाल में तो खुद अमित शाह ने जाकर शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसले पर मुहर लगवाई। अब असम में मुख्यमंत्री चुना जाना है तो यह तय है कि मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ही सीएम बनेंगे।
असल में भाजपा आलाकमान की रणनीति में यह बदलाव 2024 के लोकसभा चुनाव में लगे झटके की वजह से हुआ है पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को 63 सीटों का नुकसान हुआ था और वह अपने दम पर बहुमत नहीं हासिल कर पाई थी। तभी 2024 लोकसभा चुनाव के बाद एक दिल्ली के अपवाद को छोड़ दें तो भाजपा ने हर जगह ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया, जिसका बनना तय माना जा रहा था। महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़नवीस स्वाभाविक पसंद थे तो उनको बनाया गया। हरियाणा में तो भाजपा ने चुनाव ही लड़ा था नायब सिंह सैनी के नाम पर। उनको चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री बनाया गया था और उनके नाम पर चुनाव लड़ा गया था तो वे सीएम बने। इसी तरह बिहार में पार्टी को मौका मिला तो उसने स्वाभाविक पसंद माने जा रहे सम्राट चौधरी को बनाया। पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी बने और असम में सरमा बनेंगे। इसका यह अर्थ है कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव में अपने मुख्यमंत्रियों की परफॉरमेंस का आकलन किया है। उसको भी समझ में आया है कि जनता के बीच लोकप्रिय और मजबूत सामाजिक आधार वाले नेता को मुख्यमंत्री बनाना आगे की राजनीति के लिए जरूरी है। यह भी समझ में आया है कि नरेंद्र मोदी का करिश्मा और अमित शाह के प्रबंधन के साथ साथ राज्यों में मजबूत नेतृत्व भी जरूरी है।
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