चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों में से देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई है। उसके पास पहले से दो सीटें थीं और उसने दोनों सीटें गंवा दी हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और एसआईआऱ के विरोध में देश भर में आंदोलन खड़ा कर रहे राहुल गांधी के लिए नैरेटिव के स्तर पर यह बड़ा सेटबैक है। कांग्रेस ने अपनी एक सीट कर्नाटक में गंवाई है। कर्नाटक में जिन चार सीटों पर चुनाव हुए थे उनमें से एक सीट कांग्रेस की और तीन भाजपा की थी। भाजपा ने अपनी तीनों सीटें बचा ली हैं। लेकिन कांग्रेस की सीट जेडीएस ने जीत ली है।
कांग्रेस के बड़े नेता पुटन्ना बेंगलुरू शिक्षक सीट से एमएलसी थे और पांच बार से जीत रहे थे। इस बार वह सीट जेडीएस के खाते में गई और उसके एपी रंगनाथ चुनाव जीत गए। यह निजी तौर पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए झटका है तो पूरी पार्टी के लिए भी है। कांग्रेस के पास दूसरी सीट बिहार की दरभंगा शिक्षक सीट थी, जहां से उसके पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा एमएलसी थे। इस बार वे चुनाव हार गए हैं। जनसुराज पार्टी के सुरेश राय ने उनको चुनाव हरा दिया है। इस तरह कांग्रेस शून्य पर आ गई है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने चार राज्यों की 28 में से 14 विधान परिषद सीटें जीत ली हैं। यानी 50 फीसदी सीटें भाजपा ने जीती है। उसने बिहार में अपनी जीती एक सीट गंवाई है लेकिन नई सीट जीत कर संख्या बराबर कर ली है। कर्नाटक में उसने तीन सीटें बचा ली तो उत्तर प्रदेश में भी उसकी छह सीटें कायम रहीं।
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