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केरल में सीपीएम बनाम सीपीआई

केरल में लगातार 10 साल राज करने के बाद लेफ्ट मोर्चा सत्ता से बाहर हुआ है और सत्ता से बाहर होते ही मोर्चे की पार्टियों में खींचतान शुरू हो गई है। वैसे सीपीएम और सीपीआई के बीच पहले से तनातनी रहती है और कई बातों पर सरकार में रहते भी मतभेद रहे थे। जैसे सीपीएम नेता पिनराई विजयन की सरकार ने केंद्र सरकार का फंड हासिल करने के लिए स्कूलों लागू होने वाली पीएमश्री योजना को लागू करना चाहा था लेकिन सीपीआई के विरोध के कारण सरकार को पीछे हटना पड़ा था। विपक्ष में आने के बाद दोनों में वैचारिक और अन्य मुद्दों पर संघर्ष तेज हो गया है।

दोनों के बीच विवाद का ताजा मामला विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष का पद है। नेता प्रतिपक्ष का पद पहले ही सीपीएम को मिल गया है। पूर्व मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। अब उप नेता प्रतिपक्ष पद पर भी सीपीएम ने ही दावा किया है। दूसरी ओर सीपीआई का कहना है कि लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी एलडीएफ को सामूहिक नेतृत्व के सिद्धांत पर चलना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष का पद अगर सीपीएम ने लिया है तो उप नेता प्रतिपक्ष का पद सीपीआई को मिलना चाहिए। गौरतलब है कि 10 साल सरकार चलाने के बाद एलडीएफ बहुत बुरी तरह हारा। 140 सदस्यों की विधानसभा में उसे सिर्फ 35 सीटें मिलीं। इनमें से 26 विधायक सीपीएम के हैं और सीपीआई के आठ विधायक हैं। इसी आधार पर सीपीआई अपने लिए एक पद मांग रही है। इस मसले पर दोनों का विवाद बढ़ेगा।

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By NI Political Desk

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