हरियाणा में राज्यसभा चुनाव में जैसे तैसे राहुल गांधी की इज्जत बची है और जैसे तैसे भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपनी इज्जत बचाई। राहुल ने बिना किसी से सलाह मशविरा किए करमबीर बौद्ध को उम्मीदवार बना दिया था। पहले दिन से उनका विरोध शुरू हो गया। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और एक सीट जीतने के लिए 31 वोट ती जरुरत थी। फिर भी कांग्रेस विधायकों को हिमाचल प्रदेश ले जाकर रखना पड़ा और फिर भी कांग्रेस उम्मीदवार को 28 वोट ही मिले। नौ वोट खराब हो गए। इनमें से चार विधायकों की वोट अवैध हुई, जबकि पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। पहले ऐसा लग रहा था कि अगर हुड्डा चाहेंगे तभी कोई विधायक टूटेगा या क्रॉस वोटिंग होगी। लेकिन ऐसा नहीं था। उनके तमाम प्रयास के बावजूद विधायक टूटे।
कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग करने वाले पांच विधायकों पर कार्रवाई करने का फैसला किया है। दिलचस्प बात यह है कि इसमें दो मुस्लिम विधायक हैं। कांग्रेस के जानकार सूत्रों का कहना है कि क्रॉस वोटिंग करने वाले पांच और वोट अवैध कराने वाले चार विधायकों को देखें तो उसमें हुड्डा का करीबी एक ही विधायक है। तीन विधायक सिरसा के हैं, जहां से कुमारी शैलजा सांसद हैं। इसी तरह दो महिला विघायक ऐसी हैं, जिनको जाति के आधार पर शैलजा का करीबी माना जाता है। दो मुस्लिम विधायकों में से एक भी विधायक टिकट बंटवारे के समय हुड्डा की पहली पसंद का उम्मीदवार नहीं था। सो, ऐसा लग रहा है कि हरियाणा कांग्रेस के अंदर की गुटबाजी राज्यसभा चुनाव पर हावी रही और हुड्डा ने जैसे तैसे अपनी और राहुल गांधी की इज्जत बचाई। राहुल को इस बात की जानकारी दे दी गई है।


