देश के दो सबसे बड़े उद्योगपतियों मुकेश अंबानी और गौतम अडानी ने गजब किया। पांच दिन के इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में अंबानी ने कहा कि वे अगले सात साल में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई में करेंगे। गौतम अडानी क्यों पीछे रहते। उन्होंने ऐलान किया वे अगले 10 साल में यानी 2035 तक 18 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश एआई सेक्टर में करेंगे। अब सोचें, मुकेश अंबानी सिर्फ एआई सेक्टर में हर साल डेढ़ लाख करोड़ रुपए और गौतम अडानी हर साल एक लाख 80 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेंगे। यानी सिर्फ दो उद्योगपति सिर्फ एक सेक्टर में हर साल दो लाख 80 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेंगे!
अब सोचें, भारत सरकार इस साल कुल 12 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगी। उसके लगभग 30 फीसदी के बराबर अंबानी और अडानी समूह का निवेश होगा और वह भी सिर्फ एक सेक्टर में। ध्यान रहे एआई दोनों कारोबारियों का मुख्य धंधा नहीं है। जाहिर है दोनों अपने मुख्य धंधे यानी पेट्रोलियम, रिटेल, संचार, हवाईअड्डा, बंदरगाह, सड़क परिवहन, पावर, माइनिंग आदि में भी निवेश करेंगे। अब सवाल है कि अपने मुख्य धंधे में भी दोनों लाखों करोड़ का निवेश करेंगे तो इतना पैसा कहां से लाएंगे और इतने पैसे के निवेश से कितना रोजगार पैदा होगा और भारत की विकास दर कहां से कहां पहुंच जाएगी? तभी इनके वादों पर संदेह होता है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि एआई का बढ़ता बाजार देख कर उसमें निवेश की भारी भरकम घोषणा हुई, जिससे शेयर बाजार में कंपनी की बाजार पूंजी बढ़ी।
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