उच्च शिक्षा संस्थानों में कथित भेदभाव मिटाने के लिए लाए गई यूजीसी की नियामवली से जमीनी स्तर पर भाजपा का सामाजिक समीकरण बिगड़ा है। लेकिन उससे बहुत ज्यादा बिखराव सोशल मीडिया में है। सोशल मीडिया में भाजपा और राइटविंग का जो इकोसिस्टम था वह पूरी तरह से एकरूप था। उसके सारे सदस्य एक जैसी बातें करते थे, एक जैसी पोस्ट की जाती थी, हर पोस्ट सरकार, भाजपा और संघ की जय जय करने वाली होती थी और एक तरह का नैरेटिव चलाया जाता था। निगेटिव खबर को कैसे एडवांटेंज में बदलना है यह भाजपा के राइटविंग से बेहतर कोई नहीं जानता था। भाजपा आईटी सेल के अमित मालवीय की ओर से जो स्पिन दिया जाता था वह मुख्यधारा के नैरेटिव के तौर पर स्थापित हो जाता था। लेकिन अब यह फैब्रिक बुरी तरह से बिखर गया है। यहां तक कि खुद अमित मालवीय और दूसरे स्पिन मास्टर ही निशाने पर आ गए हैं।
भाजपा और राइटविंग के सबसे मुखर योद्धाओं में से एक अजीत भारती ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। यूजीसी की नियमावली के बाद अजीत भारती ने पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को निशाना बनाया। उसके बाद उनके निशाने पर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत भी हैं। अजीत भारती के साथ राइटविंग के ज्यादातर सवर्ण सदस्य हैं। बिहार की तो पूरी टीम ही उनके साथ जुड़ गई है। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि भाजपा का आईटी सेल उनकी साख बिगाड़ने को उतरा है। अजीत भारती के 12 साल पुराने पोस्ट निकाल कर साबित किया जा रहा है कि वे पहले वामपंथी थे और तब भाजपा पर हमला करते थे। अभी स्थिति यह हो गई है कि अजीत भारती एंड कंपनी और भाजपा की आईटी सेल के बीच जंग छिड़ी है। इसका नतीजा यह है कि हर केंद्र सरकार और भाजपा का हर नैरेटिव उलटा पड़ रहा है।


