तेलंगाना के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रशेखऱ राव ने 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले जो दांव चला था उसी से मिलता जुलता दांव ममता बनर्जी भी चल रही हैं। चंद्रशेखर राव दो बार जीते और तीसरी बार चुनाव में जाने से पहले उन्होंने अपनी अखिल भारतीय नेता की छवि का प्रचार शुरू किया। वे विशेष विमान लेकर देश भर के विपक्षी नेताओं से मिलने गए। उन्होंने भाजपा के खिलाफ एक राष्ट्रीय गठबंधन बनाने का प्रयास किया। चंद्रशेखर राव ने महाराष्ट्र का धुआंधार दौरा किया और वहां पार्टी संगठन खड़ा करने का प्रयास किया और अंत में उन्होंने अपनी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति का नाम बदल कर भारत राष्ट्र समिति कर लिया। लेकिन इस पूरी कवायद के अंत यह हुआ कि उनकी पार्टी चुनाव हार कर सत्ता से बाहर हो गई। कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की और रेवंत रेड्डी मुख्यमंत्री बने।
अब इसी तरह का कुछ काम पश्चिम बंगाल में होता दिख रहा है। हालांकि चंद्रशेखर राव की तरह ममता बनर्जी ज्यादा भागदौड़ नहीं कर रही हैं। लेकिन उनकी पार्टी के नेता परदे के पीछे से इस बात के प्रयास कर रहे हैं कि ममता बनर्जी को ही भाजपा से लडऩे वाले अखिल भारतीय नेता के तौर पर प्रोजेक्ट किया जाए। पिछले दिनों समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कोलकाता में ममता बनर्जी से मुलाकात की और ममता की मौजूदगी में मीडिया से कहा कि भाजपा से सिर्फ ममता बनर्जी ही लड़ सकती हैं। बाद में कांग्रेस के नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा कि ममता बनर्जी को ‘इंडिया’ ब्लॉक का नेतृत्व सौंप देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर ममता नहीं रहेंगी तो विपक्षी गठबंधन में कुछ नहीं बचेगा। माना जा रहा है कि कांग्रेस की बजाय ममता के भाजपा से लड़ने की नैरेटिव इसलिए बनाया जा रहा है ताकि राज्य के करीब 30 फीसदी मुस्लिम वोट का पूरी तरह से ममता के साथ रहना सुनिश्चित किया जाए। दूसरा कारण वही है, जो केसीआर का था। बंगालियों में यह गर्व पैदा करना की ममता बनर्जी राष्ट्रीय नेता हो सकती हैं और पहली बंगाली प्रधानमंत्री भी हो सकती हैं। वे बांग्ला गर्व वाले मुद्दे भी उठा रही हैं। जैसे उन्होंने केरल का नाम केरलम किए जाने की मिसाल दी और कहा कि पश्चिम बंगाल का नाम बंगाल या बांग्ला नहीं किया जा रहा है।
Leave a comment
You must be logged in to post a comment.



