देश की सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टी सीपीएम के महासचिव एमए बेबी ने विपक्षी गठबंधन की बैठक बुलाने की पहल की। इस पहल पर ममता बनर्जी ने सबसे पहले जवाब दिया और उन्होंने बेबी से फोन पर बात की। कांग्रेस ने भी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और उसके बाद 30 सितंबर की बैठक तय हुई। लेकिन ऐसा लग रहा है कि सीपीएम का अपना भी एजेंडा है। वह कांग्रेस को इसका पूरा श्रेय नहीं लेने देना चाहती है। सीपीएम जन प्रतिरोध के मुद्दों पर खुद को आगे रख रही है। जानकार नेताओं का कहना है कि कांग्रेस में आंदोलन करने की क्षमता खत्म हो गई है। इसलिए सीपीएम को आगे रहना चाहिए।
दूसरा कारण यह है कि केरल में सीपीएम और कांग्रेस के बीच घमासान छिड़ा है। सीपीएम के नेता इस बात से नाराज हैं कि कांग्रेस ने केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी के कहने पर पूर्व मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए हैं। तभी सीपीएम का अपना राजनीतिक दांवपेंच अलग चल रही है। यह एमए बेबी जब दिल्ली पहुंचे तब भी देखने को मिला। उन्होंने आते ही दिल्ली में आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से मिले। गौरतलब है कि केजरीवाल अब अपने को ‘इंडिया’ ब्लॉक से अलग मानते हैं। पिछली बैठक में उनकी पार्टी शामिल नहीं हुई थी। ममता बनर्जी और एमए बेबी की भी बात हुई है। ममता चुनाव हारने के बाद से विपक्षी गठबंधन को सक्रिय करने में ज्यादा रूचि दिखा रही हैं लेकिन इससे पहले तो उन्होंने भी ‘इंडिया’ ब्लॉक को छोड़ ही दिया था।
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