मुंबई के मेयर चुनाव में सिर्फ इतनी ही दिलचस्पी नहीं है कि भाजपा पहली बार अपना मेयर बनाएगी या नहीं और एकनाथ शिंदे का दांव चलेगा या नहीं उससे ज्यादा दिलचस्पी वाली बात यह हो गई है कि अगर मेयर पद के आरक्षण को लेकर जो पर्ची निकलेगी उसमें एसटी की पर्ची निकल गई तो क्या होगा? ध्यान रहे मेयर का पद रोटेशन के जरिए एससी, एसटी, ओबीसी, महिला और सामान्य वर्ग में बंटता है। यह संविधान के 74वें संशोधन के जरिए सुनिश्चित किया गया और उसके बाद मुंबई म्यूनिशिपल कॉरपोरेशन के कानून से इसे लॉटरी के जरिए चुनने का फैसला हुआ ताकि कोई भेदभाव का आरोप नहीं लगे।
इस बार एसटी, ओबीसी और सामान्य वर्ग की लॉटरी डाली जाएगी। भाजपा और एकनाथ शिंदे दोनों की पार्टी की धड़कनें बढ़ी हैं कि अगर एसटी की पर्ची निकल गई तो क्या होगा? ऐसा इसलिए है क्योंकि भाजपा या एकनाथ शिंदे की शिव सेना का कोई एसटी पार्षद नहीं जीता है। महाराष्ट्र में दो सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। दोनों सीटें उद्धव ठाकरे की पार्टी ने जीती हैं। एक पर जितेंद्र वलवी और दूसरे पर प्रियदर्शिनी ठाकरे जीती हैं। अगर एसटी की पर्ची निकलती है तो फिर उद्धव ठाकरे के पार्षद को मेयर बनाने की मजबूरी हो जाएगी। हालांकि कई जानकार मान रहे हैं कि नगर निगम में दलबदल कानून लागू नहीं होता है। इसलिए संभव है कि एसटी की पर्ची निकले तो उद्धव का एक पार्षद भाजपा में चला जाए। वह मेयर बन जाए तो शिव सैनिक को मेयर बनाने की बात भी पूरी हो जाएगी।
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