कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रति नजरिया बदल रहा है। पिछले काफी समय से उनको ‘पप्पू’ कहना बंद कर दिया गया है। उसकी जगह उनको देश विरोधी कहा जाता है। उन पर आरोप लगते हैं कि वे विदेशी एजेंसियों या दुनिया के दूसरे देशों में बैठे भारत विरोधी लोगों के साथ मिल कर भारत के खिलाफ साजिश रच रहे हैं। लेकिन अब एक नया बदलाव यह दिख रहा है कि राहुल के ऊपर भाजपा के बड़े नेता बयान दे रहे हैं और राहुल की बातों का जवाब भी बड़े नेताओं को देना पड़ रहा है। पहले भाजपा के छोटे छोटे नेता कुछ भी बोलते रहते थे और बड़े नेता आमतौर पर चुप रहते थे। छोटे नेता या प्रवक्ता आदि अब भी रूटीन में राहुल गांधी के ऊपर हमला करते हैं। लेकिन ऐसा लग रहा है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को यह फीडबैक है कि प्रवक्ताओं की बातों का ज्यादा असर नहीं हो रहा है। अब लोग राहुल को उनकी आलोचनाओं से ऊपर मानने लगे हैं।
तभी भाजपा के बड़े नेताओं ने कमान संभाली है। भारत और अमेरिका व्यापार संधि को लेकर राहुल के हमलों का जवाब खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दे रहे हैं। राहुल गांधी शुक्रवार, 13 फरवरी से लगातार व्यापार संधि को लेकर कोई न कोई बात कह रहे हैं। राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए अमित शाह ने गांधीनगर में कहा कि राहुल देश के लोगों को गुमराह कर रहे हैं, झूठ फैला रहे हैं, भ्रम फैला रहे हैं। इससे पहले राहुल के ऊपर हमला होता था लेकिन उनकी बातों का जवाब नहीं दिया जाता था। अमित शाह उनको ‘राहुल बाबा’ कह कर उनका मजाक उड़ाते थे लेकिन किसी नीतिगत मसले पर उनकी बातों का नाम लेकर जवाब नहीं देते थे। भारत और अमेरिका व्यापार संधि में खासतौर से किसानों के मसले को लेकर सरकार को लग रहा है कि राहुल की बातों का असर हो सकता है। पिछले दिनों संसद सत्र के दौरान वे किसान संगठनों के नेताओं से भी मिले थे। संभवतः इसलिए भी उनकी बातों का जवाब देना जरूरी हो गया है।
इससे पहले राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जब राहुल गांधी ने बोलना शुरू किया और पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब का अंश पढ़ने का प्रयास किया तो उनको रोकने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह खड़े हुए। राहुल गांधी को बोलने से रोकने के लिए संसदीय कार्य मंत्री और दूसरे नेता काफी थे। स्पीकर ने भी रूलिंग दे दिया था कि अप्रकाशित किताब का अंश सदन में नहीं पढ़ा जा सकता है। लेकिन राहुल गांधी मान नहीं रहे थे। सोचें, राहुल 46 मिनट तक सदन में खड़े रहे और बोलने का प्रयास करते रहे। इस दौरान राजनाथ सिंह ने 11 बार खड़े होकर उनको टोका और सात बार अमित शाह ने खड़े होकर टोका। सो, संसद के अंदर और बाहर अब पार्टी के बड़े नेता राहुल की बातों का जवाब दे रहे हैं। पिछले सत्र के दौरान जिस तरह से राहुल ने संसद के परिसर में दो केंद्रीय मंत्रियों प्रहलाद जोशी और अश्विनी वैष्णव की मीडिया बाइट के दौरान घुस कर उनको टोका और वे दोनों वहां से चुपचाप चले गए वह भी दिखा रहा है कि सरकार के मंत्रियों को राहुल से नहीं उलझने का निर्देश है। हालांकि राहुल का वह आचरण संसदीय परंपरा के अनुकूल नहीं था। लेकिन उससे बदलती हुई चीजें दिख रही हैं। हालांकि निशिकांत दुबे और गिरिराज सिंह इन बातों से परे हैं। वे दोनों राहुल गांधी के प्रति अधिक से अधिक अपमानजनक बातें कहने के लिए फ्री छोड़े गए हैं।


