समझ में नहीं आ रहा है कि सरकार और उसकी एजेंसियां शिक्षा व छात्रों के साथ क्या करना चाहती है? 12वीं की परीक्षा में कॉपियों की दोबारा जांच के चक्कर में इस समय लाखों छात्र भटक रहे हैं तो नीट के करीब 23 लाख छात्रों की किस्मत भी अधर में लटका दी गई है। अब सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रविवार, 24 मई को संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की आईएएस, आईपीएस सहित दूसरी केंद्रीय सेवाओं के लिए प्रारंभिक परीक्ष हुई। परीक्षा के बाद ही प्रश्न पत्र को लेकर सवाल उठने लगे। ऐसा लग रहा है कि सारे प्रयोग सरकार शिक्षा के क्षेत्र में ही करना चाहती है।
बताया जा रहा है कि इस साल यूपीएससी का पेपर इतना भारी था कि ज्यादातर छात्रों को समझ ही नहीं आया। इतना मुश्किल पेपर सेट करने के फैसले का बचाव करते हुए कई लोगों ने कहा कि छात्रों को कोचिंग सेंटर वालों के चंगुल से बचाने के लिए इस तरह का पेपर सेट किया गया। लेकिन ज्यादातर लोगों ने लिखा कि इस बार यूपीएससी बनाम अभ्यर्थी हो गया था। यह भी कहा गया कि पेपर सेट करने वालों को भी इस परीक्षा में बैठा दिया जाता तो 30 फीसदी से ज्यादा सवाल नहीं हल कर पाते।


