राहुल गांधी अपने ही नेताओं की पोल खोलते रहते हैं और वह भी जनता के बीच। तभी भाजपा और दूसरी पार्टियों को भी मौका मिलता है कांग्रेस नेताओं पर वार करने का। राहुल गांधी ने लखनऊ में जनता के बीच कहा कि कांग्रेस के नेता बहुत अमीर हैं लेकिन कांग्रेस गरीब पार्टी है। इस पर खूब तालियां बजीं। कांग्रेस इकोसिस्टम के लोग भी सोशल मीडिया में तालियां बजा रहे हैं कि अद्भुत आदमी हैं राहुल गांधी। सवाल है कि इसमें क्या अद्भुत काम है? कांग्रेस के नेता कैसे अमीर हो गए? कुछ लोग निश्चित रूप से ऐसे हैं, जिन्होंने अपने कामकाज से पैसा बनाया, जैसे अभिषेक सिंघवी ने तीन हजार करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित की है। लेकिन ज्यादातर लोग तो सरकार में रह कर ही अमीर हुए हैं। तो क्या अगर वे अमीर हुए हैं तो कांग्रेस की सरकारों को ईमानदार माना जाएगा? भाजपा के नेता कह रहे हैं कि कांग्रेस सरकारों को एटीएम बना देती है तो राहुल गांधी भी उस बात की पुष्टि कर रहे हैं। वे भी परोक्ष रूप से यही कह रहे हैं कि कांग्रेस के नेता सरकार को एटीएम बना लेते हैं लेकिन वहां से पैसा निकल कर खुद रखते हैं, पार्टी को नहीं देते हैं।
इसी तरह राहुल गांधी गुजरात गए तो वहां उन्होंने कह दिया कि पार्टी के बहुत सारे लोग भाजपा से मिले हुए हैं। जनता के बीच यह बात कहने से क्या हासिल हुआ? उन्होंने कहा था कि ऐसे लोगों की पहचान करके उनको पार्टी से निकाला जाएगा लेकिन काफी अरसा बीत जाने के बाद भी किसी को निकाला नहीं गया। उलटे उनके बयान के बाद उपचुनाव में कांग्रेस बुरी तरह से हारी, जबकि आम आदमी पार्टी अपनी सीट बचाने में कामयाब रही। उलटे आप को मौका मिल गया यह बताने का कि कांग्रेस के नेता भाजपा से मिले हुए हैं और सिर्फ आप ही भाजपा से लड़ रही है। बहरहाल, राहुल के बयान के बाद यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस गरीब पार्टी है तब भी चुनावों में करोड़ों खर्च करती है। बिहार में वह 60 सीटों पर लड़ी और 35 करोड़ रुपए खर्च किए। उम्मीदवारों का खर्च अलग है। बिहार में कांग्रेस का एक विधायक छह करोड़ रुपए का पड़ा है।


