कांग्रेस संगठन में अनेक पद खाली हैं और राहुल गांधी को नियुक्तियां करनी हैं। वैसे तो उन्होंने पिछले साल को ही संगठन का साल कहा था लेकिन संगठन को लेकर कोई बड़ा फैसला उन्होंने नहीं किया। धीरे धीरे कई पद खाली होते चले गए और नई नियुक्ति नहीं हुई। तभी कई राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति होनी है तो प्रभारी और महासचिव भी बनाए जाने हैं। हाल में राज्यों में हुए बदलावों की वजह से भी पद खाली हुए हैं। जैसे कर्नाटक में डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने से प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली हुआ है। वहां तत्काल बीके हरिप्रसाद की नियुक्ति हो गई। वे प्रदेश अध्यक्ष बन गए। लेकिन उससे पहले बीके हरिप्रसाद हरियाणा के प्रभारी थे। अब भी उनके पास ही यह पद है। ऐसे ही रमेश चेन्निथला को केरल सरकार में मंत्री बनाया गया। वे महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य के प्रभारी हैं। सो, अब कांग्रेस को जल्दी से जल्दी हरियाणा और महाराष्ट्र में प्रभारी की नियुक्ति करनी है। केरल में कांग्रेस की सरकार बनी तो सन्नी जोसेफ को राज्य का ऊर्जा मंत्री बनाया गया। वे प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं। उनकी भी दोहरी जिम्मेदारी नहीं रहेगी। सो, वहां जल्दी ही नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करना है। ऐसे ही तमिलनाडु में चुनाव के बाद वहां के प्रभारी गिरीश चोडनकर को गोवा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। सो, तमिलनाडु में नया प्रभारी नियुक्त होना है।
राज्यों में हुए बदलावों के अलावा भी कांग्रेस में कई पद खाली हुए हैं। जैसे असम में कांग्रेस के बुरी तरह से हारने के बाद प्रभारी महासचिव जितेंद्र सिंह ने इस्तीफा दिया है तो गुजरात कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने भी इस्तीफा दे दिया है। दोनों राज्यों के लिए नए प्रभारी बनाने की चर्चा है। अगले साल जिन राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं वहां भी बदलाव की चर्चा है। खास कर उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में। पंजाब में राहुल गांधी को जाट सिख, दलित और हिंदू का संतुलन बनाना है और ले देकर उसके पास चार ही चेहरे हैं। प्रदेश अध्यक्ष राजा अमरिंदर सिंह वारिंग, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और राजस्थान के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा। कांग्रेस तय नहीं कर पा रही है कि इन चेहरों का प्रभावी तरीके से कैसे इस्तेमाल किया जाए। नवजोत सिंह सिद्धू अब लगभग हाशिए में हैं और अलग ही हो चुके हैं।
चुनाव वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश का मामला थोड़ा उलझा हुआ है। कांग्रेस को वहां सोच समझ कर फैसला करना है। पिछले करीब तीन साल से अजय राय प्रदेश अध्यक्ष हैं। अविनाश पांडे प्रभारी हैं और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी अराधना मिश्रा विधायक दल की नेता हैं। राहुल गांधी के पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक राजनीति में ये फिट नहीं बैठ रहे हैं। अध्यक्ष या प्रभारी में से कोई एक बदलेगा, इसकी चर्चा है। उत्तराखंड में कांग्रेस को जल्दी ही फैसला करना है कि फिर हरीश रावत का चेहरा ही आगे रहेगा या किसी और को प्रमोट करना है। राहुल गांधी की पहले की कई नियुक्तियों को लेकर सवाल उठे हैं। यह चर्चा भी है कि वे उसमें कुछ बदलाव कर सकते हैं। जैसे बिहार में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम को बदलने की चर्चा है। पिछले साल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह को हटा कर उनकी जगह राजेश राम को अध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन वे खुद भी अपनी सीट हार गए और कांग्रेस ने ऐतिहासिक रूप से खराब प्रदर्शन किया। सो, कुल मिला कर कांग्रेस को कई प्रदेश अध्यक्ष और कई प्रभारी नियुक्ति करने हैं।


