उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए अधिसचूना जारी हो गई है। मंगलवार, 29 सितंबर को अधिसूचना जारी हुई। 16 अक्टूबर को चुनाव होगा और उसी दिन नतीजे आएंगे। नामांकन की अंतिम तारीख छह अक्टूबर है। इसका अर्थ है कि अगला एक हफ्ता खूब राजनीतिक सक्रियता और दिलचस्पी वाला है। इसका पहला कारण तो यह है कि राज्य में पांच महीने में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। दूसरा कारण यह है कि दो केंद्रीय मंत्री ऐसे हैं, जो उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सांसद हैं और उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है। तीसरा कारण यह है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में दो नए महामंत्री बनाए गए हैं, जिनका नाम उत्तर प्रदेश कोटे से तय हुआ है और दोनों किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। चौथा कारण यह है कि कई मशहूर और राजनीतिक हस्तियां इस बार उत्तर प्रदेश से राज्यसभा टिकट की दावेदार हैं।
इन दावेदारों की सूची लंबी है। बताया जा रहा है कि पार्टी के प्रदेश कमेटी की ओर से भाजपा के कोटे वाली आठ सीटों के लिए तीन तीन नाम भेजे गए हैं। इस तरह कुल 25 नाम भेजे जाने की चर्चा है और कहा जा रहा है कि इन 25 में से ही आठ लोग चुने जाएंगे। आधिकारिक रूप से इस सूची की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन अगर यह सूची सही है तो सबसे दिलचस्प नाम कुमार विश्वास का है। हिंदी के लोकप्रिय कवि हैं, जो अब राम कथा कहने लगे हैं और हर मंच से भाजपा के समर्थन व विपक्ष की आलोचना करते हैं। वे काफी समय से और अलग अलग पार्टियों से राज्यसभा जाने का प्रयास कर रहे हैं। जो सूची सोशल मीडिया में घूम रही है उसमें तीसरे नंबर पर उनका नाम है। वे दिल्ली से सटे गाजियाबाद के पिलखुवा के रहने वाले हैं और ब्राह्मण हैं। आम आदमी पार्टी की टिकट से 2019 का चुनाव अमेठी सीट से राहुल गांधी के खिलाफ लड़े थे और तीसरे स्थान पर रहे थे। तब भाजपा की उम्मीदवार स्मृति ईरानी भी चुनाव हार गई थीं। स्मृति ईरानी का नाम भी संभावित दावेदारों में है। वे इस बार अमेठी से चुनाव हार गई हैं। उनको हाल में पार्टी का महामंत्री बनाया गया है। उनको दो भाजपा शासित राज्यों हरियाणा और छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया है। उनको राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा है।
दूसरे महामंत्री हरीश द्विवेदी हैं, जिनको राज्यसभा भेजने की चर्चा है। वे बस्ती से लोकसभा के सांसद रहे हैं लेकिन पिछला चुनाव हार गए थे। कुमार विश्वास और हरीष द्विवेदी दो ब्राह्मण चेहरों की चर्चा है। हालांकि इनके अलावा रमापति राम त्रिपाठी, त्रयंबक त्रिपाठी और सुब्रत पाठक के नाम की भी चर्चा है। केंद्र सरकार के दोनों मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा जोर लगा रहे हैं। पुरी को लेकर संशय है लेकिन बीएल वर्मा को लेकर माना जा रहा है कि वे ओबीसी समुदाय से हैं और चुनाव से पहले भाजपा गैर यादव ओबीसी नेता को हटाने का रिस्क नहीं लेगी। इनके अलावा जो चर्चित नाम हैं उनमें पूर्व पुलिस अधिकारी बृजलाल का नाम है। वे बसपा से आए हैं और कहा जा रहा है कि उनको फिर से राज्यसभा भेजा जाना तय है। तीन और बड़े नामों की चर्चा है, जिनको लेकर दिल्ली में खूब कयासबाजी है। इनमें एक नाम पूर्व मुख्यमंत्री और उत्तर प्रदेश में भाजपा के हिंदुत्व का चेहरा रहे कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया का है। वे लोध जाति से आते हैं, जो एक बड़ा जातीय समूह है। हालांकि उनके बेटे को राज्य सरकार में मंत्री बनाया गया है। मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे पूर्व मंत्री सत्यपाल सिंह भी दावेदार हैं और जाट नेता संजीव बालियान के नाम की भी चर्चा हो रही है। ये सारे नेता जोर लगा रहे हैं। फैसले नरेंद्र मोदी और अमित शाह को करना है।
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