शरद पवार ने सारी अटकलों पर विराम लगा दिया है। कम से कम अभी कुछ दिन के लिए यह चर्चा थम गई है कि पवार अपनी पार्टी का विलय सुनेत्रा पवार की पार्टी में कर सकते हैं। उन्होंने कहा है कि वे अपनी पार्टी का विलय नहीं करेंगे और किसी को जरुरत है तो वह आकर उनकी पार्टी में विलय करे। यानी अगर सुनेत्रा पवार को परिवार की एकजुटता की चिंता है तो वे अपनी पार्टी का विलय शरद पवार की पार्टी में करें। हालांकि ऐसा होने की संभावना नहीं है क्योंकि सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार को अलग और स्वतंत्र राजनीति रास आ रही है। उनको अकेले मराठा राजनीति करनी है। लेकिन शरद पवार की इस घोषणा से यह तय हो गया कि अभी वे विलय नहीं कर रहे हैं और न एनडीए के साथ जा रहे हैं।
सवाल है कि ऐसा कैसे हो गया? कुछ दिन पहले तक लग रहा था कि अगर शरद पवार विलय नहीं करते हैं या एनडीए के साथ नहीं जाते हैं तो पार्टी टूट जाएगी। उनकी पार्टी के 10 में से सात या आठ विधायकों और आठ में से कम से कम छह सांसदों के टूटने की खबर थी। हालांकि तब भी यह खबर आई थी कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से यह मैसेज किया गया है कि शरद पवार का ख्याल रखना है। पवार ने न सिर्फ विलय से इनकार किया है, बल्कि उससे पहले खुल कर टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा का समर्थन किया। उन्होंने टाटा संस की लिस्टिंग के मामले में नोएल टाटा का साथ दिया। माना जा रहा है कि सरकार की शह पर टाटा संस की लिस्टिंग की तैयारी हो रही है। तभी ऐसा लग रहा है कि राजनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर शरद पवार ने सरकार से अलग लाइन तय की है।
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