संसद के मानसून सत्र से पहले महाराष्ट्र के सबसे बड़े मराठा क्षत्रप शरद पवार की मुश्किलें बढ़ी हैं। उद्धव ठाकरे की शिव सेना में टूट की खबरों के बाद सबसे ज्यादा बेचैनी शरद पवार की एनसीपी में है। कांग्रेस, उद्धव और शरद पवार की पार्टियों के महाविकास अघाड़ी ने पिछले लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया था और राज्य की 48 में से 31 सीटें जीती थीं। लेकिन चार महीने बाद ही विधानसभा चुनाव में तीनों पार्टियां का बुरा हाल हो गया। अब उद्धव ठाकरे के नौ में से छह या सात सात सांसद एकनाथ शिंदे की शिव सेना में जा रहे हैं। इस बीच शरद पवार की एनसीपी के आठ सांसदों में से पांच या छह के टूटने की चर्चा शुरू हो गई है।
जानकार सूत्रों का कहना है कि शरद पवार की पार्टी के नेता उनके ऊपर दबाव डाल रहे हैं कि वे अपनी पार्टी का विलय सुनेत्रा पवार की एनसीपी के साथ कर दें। अगर ऐसा नहीं होता है तो कई सांसद और विधायक पाला बदल सकते हैं। उनकी पार्टी के सांसद मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के संपर्क में बताए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि अगर विलय हो जाता है तो शरद पवार खेमे के भी कुछ लोगों को महाराष्ट्र सरकार में जगह मिल जाएगी और उनकी बेटी सुप्रिया सुले को दिल्ली में मोदी सरकार में मंत्री बना दिया जाएगा। इस तरह परिवार के सभी सदस्यों की भूमिका स्पष्ट हो जाएगी। सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र में तो सुप्रिया दिल्ली में राजनीति करेंगी। पता नहीं सुनेत्रा पवार इस व्यवस्था में कितनी सहज होंगी। अपने बेटे पार्थ पवार को लेकर उनकी बड़ी योजना है और उनको यह भी लग रहा है कि उसके लिए परिवार का एकजुट होना जरूरी है। जो हो अभी शरद पवार की पार्टी पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।


