तमिलनाडु विधानसभा का चुनाव बहुत रंगीनियों वाला होता है। पार्टी ऐसी ऐसी चीजें बांटती हैं, जिनके बारे में उत्तर भारत में सोचा भी नहीं जा सकता था। जिस समय उत्तर भारत के नेता रिक्शा से घूम कर माइक प्रचार करते थे उस समय तमिलनाडु में पार्टियां मिक्सर, ग्राइंडर और वॉशिंग मशीन बांटती थीं। लेकिन वह अलग बात है। इस बार चुनाव एक दिलचस्प बात यह देखने को मिल रही है कि दोनों पार्टियां एक दूसरे पर आरोप लगा रही हैं कि उसने दिल्ली के आगे सरेंडक कर रखा है। गौरतलब है कि तमिल अस्मिता के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही डीएमके के नेता एमके स्टालिन ने इसकी शुरुआत की।
उन्होंने अन्ना डीएमके का नाम लिए बगैर कहा कि तमिलनाडु की विपक्षी पार्टी का राजनीतिक फैसला दिल्ली से होता है। असल में पिछले कुछ दिनों से भाजपा के नेता अमित शाह काफी सक्रिय थे और वे गठबंधन बनवा रहे थे। इसे लेकर स्टालिन ने पलानीस्वामी के ऊपर हमला किया। तो पलानीस्वामी की पार्टी ने पलटवार करते हुए कहा कि डीएमके ने यूपीए की सरकार के समय ईडी के डर से घुटने टेके थे और कांग्रेस के सामने सरेंडर किया था। अन्ना डीएमके ने कहा कि एक समय ईडी के डर से डीएमके ने कांग्रेस के लिए 63 विधानसभा सीटें छोड़ी थीं। अन्ना डीएमके ने करुणानिधि के जमाने में दिल्ली में कांग्रेस के आगे सरेंडर करने के आरोप लगाए। इस तरह के आरोपों से दोनों पार्टियां अपने को तमिल गौरव का प्रतिनिधि बना कर चुनाव लड़ रही हैं।
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