केंद्र सरकार ने परिसीमन और महिला आरक्षण के बिल का मसौद जारी कर दिया है। इसके मुताबिक लोकसभा में साढ़े आठ सौ सीटें होंगे। इसको ध्यान में रख कर ही संसद की नई इमारत का निर्माण हुआ था। 2023 में बने नए संसद भवन में लोकसभा के अंदर 880 सांसदों के बैठने की जगह है। लेकिन परिसीमन के जरिए सरकार सिर्फ लोकसभा सांसदों की संख्या नहीं बढ़ा रही है, बल्कि राज्यों की विधानसभाओं में भी सीटों की संख्या बढ़ाई जा रही है। जैसे लोकसभा में 50 फीसदी से ज्यादा सीटें बढ़ रही हैं वैसे ही विधानसभाओं में 50 फीसदी से ज्यादा सीटें बढ़ेंगी।
इसका अर्थ है कि बिहार में 243 की जगह 364 विधायक हो सकते हैं। दिल्ली में विधायकों की संख्या 105 हो जाएगी। उत्तर प्रदेश में यह संख्या बढ़ छह सौ से ज्यादा हो जाएगी। झारखंड में कुछ समय पहले ही नई विधानसभा बनी है। इसलिए वहां 120 विधायकों के बैठने की जगह है। लेकिन बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली जैसे अनेक राज्य है, जहां विधानसभा पुरानी है। वहां 50 फीसदी सीट बढ़ने पर नई विधानसभा बनानी होगी। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में सीटें क्रमश 2030 और 2032 के चुनाव में बढ़ेंगी। लेकिन आंध्र प्रदेश, ओडिशा आदि राज्यों में तो तीन साल बाद ही सीटें बढ़ानी पड़ेंगी। इसलिए ज्यादातर राज्यों में नई विधानसभाओं का निर्माण कराना होगा।
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