भाजपा को कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने में समस्या आएगी। जगहां भाजपा की अपनी सरकार है वहां भी उसके सामने चुनौती होगी। गोवा इसका उदाहरण है। गोवा में प्रमोद सावंत की सरकार ने समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी की पूरी तैयारी कर ली थी। लेकिन ऐन मौके पर इसे टाल दिया गया। तभी एमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह को चुनौती दी है कि वे गोवा में यूसीसी लागू करके दिखाएं। गोवा जैसी समस्या भाजपा के सामने पूर्वोत्तर के राज्यों में आएगी। पूर्वोत्तर में असम में कानून पास हो गया है। इसके अलावा त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में भाजपा का अपना मुख्यमंत्री है। सिक्किम, नगालैंड औऱ मेघालय में सहयोगी पार्टी की मुख्यमंत्री है औऱ मिजोरम की सत्तारूढ़ पार्टी ने हाल ही में भाजपा को केंद्र में मुद्दों पर आधारित समर्थन देने का ऐलान किया है। इन सभी सात राज्यों में भाजपा को समान नागरिक कानून लागू करने में समस्या आएगी। सहयोगी पार्टियां आसानी से इसके लिए तैयार नहीं होंगी।
हालांकि भाजपा ने साफ कर दिया है कि अनुसूचित जनजाति यानी एसटी समुदाय को कानून से बाहर रखा जाएगा। इसलिए पूर्वोत्तर में इसे लेकर समस्या नहीं आएगी। लेकिन कई राज्यों में ईसाई आबादी भी बहुत अधिक है। गौरतलब है कि ईसाई आबादी की संवेदनशीलता को ध्यान में रख कर ही गोवा में कानून टाला गया है। पूर्वोत्तर के अलावा बिहार में भी भाजपा की योजना अटक सकती है। उसकी तीन सहयोगी पार्टियों ने बना बिल का मसौदा देखे समर्थन देने से इनकार कर दिया है। नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू, चिराग पासवान की पार्टी लोजपा और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने कहा है कि पहले वे बिल का मसौदा देखेंगे। हालांकि पहले तो जनता दल यू ने साफ मना कर दिया था और कहा था कि वह किसी हाल में बिहार में इस कानून को लागू नहीं होने देगी। भाजपा की अन्य सहयोगी पार्टियों में सुनेत्रा पवार की एनसीपी भी इसे समर्थन देने से पहले सोचेगी।
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