राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के छह महीने के बाद नितिन नबीन पहली बार उत्तर प्रदेश की यात्रा पर गए। उन्होंने दो दिन की यात्रा में उत्तर प्रदेश की समस्याओं को जाना समझा है। गौरतलब है कि बहुत जल्दी राज्य में चुनाव होने वाला है और उससे सरकार के अंदर और सरकार व संगठन के बीच कई मामलों को लेकर तालमेल नहीं बैठ रहा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वे केंद्र में मंत्री भी हैं। वे मंत्री पद छोड़ेंगे। पिछले दिनों उन्होंने सभी सांगठनिक जिलों के अध्यक्ष बनाए और संगठन के पदाधिकारियों की नियुक्ति की। उसमें जातीय समीकरण को सबसे ऊपर रखा गया है।
सोचें, कैसा विरोधाभास है कि अखिलेश यादव इन दिनों हिंदुत्व की बात कर रहे हैं और भाजपा के नेता जाति के आधार पर संगठन बना रहे हैं। बहरहाल, नितिन नबीन को उत्तर प्रदेश में पता चला है कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला भाजपा के लिए भारी पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश के लोगों में इसकी चर्चा है और इसे लेकर संघ और विश्व हिंदू परिषद के साथ साथ भाजपा की भी बदनामी है। अगर कुछ बड़े लोगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो लोग संतुष्ट नहीं होंगे। नितिन नबीन को बताया गया है कि यूजीसी के दिशानिर्देश को लेकर भी भाजपा समर्थकों में नाराजगी है। हालांकि इस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है लेकिन यह लोगों की मेमोरी में है और सोशल मीडिया में इसे लेकर अब भी चर्चा होती है। परंतु मुश्किल यह है कि भाजपा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर कोई कार्रवाई नही करना चाहती है।


