अगले साल उत्तर प्रदेश और पंजाब के साथ साथ उत्तराखंड में भी विधानसभा चुनाव है। उससे पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार में फेरबदल हुई है। 20 मार्च को धामी सरकार में पांच नए मंत्री बनाए गए। राज्य में कुल 12 मंत्री हो सकते हैं और पहली बार पूरी संख्या के बराबर मंत्री नियुक्त हुए हैं। चुनाव से पहले सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। परंतु इसके बाद से पार्टी के अंदर विरोध शुरू हो गया और नाराजगी बढ़ गई है। हालांकि भाजपा के नेता मान रहे हैं कि यह तात्कालिक प्रतिक्रिया है और धीरे धीरे सारी चीजें ठीक हो जाएंगी। लेकिन भाजपा में बढ़ रही नाराजगी के बीच कांग्रेस ने उसके नेताओं को पार्टी में शामिल कराना शुरू कर दिया है।
अभी भाजपा का कोई विधायक तो नहीं टूटा है लेकिन उसके तीन पूर्व विधायकों ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। राजकुमार ठकराल, नारायण पाल और भीमलाल आर्या ने कांग्रेस की प्रभारी कुमारी सैलजा की मौजूदगी में कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की। इन तीन पूर्व विधायकों के अलावा भाजपा के प्रदेश नेताओं गौरव गोयल, लखन सिंह और अनुज गुप्ता भी कांग्रेस में शामिल हो गए। असल में उत्तराखंड में लगातार नौ साल से भाजपा की सरकार है और इस दौरान तीन मुख्यमंत्री बदले हैं। पूर्व मुख्यमंत्रियों के समर्थकों में सरकार को लेकर नाराजगी है तो मंत्रिमंडल में विस्तार के बाद से कई वरिष्ठ नेता अनदेखी के आरोप लगा रहे हैं। मंत्रिमंडल में विस्तार के बाद यह भी तय हो गया है कि अगला चुनाव धामी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। इससे भी कई नेताओं को एंटी इन्कम्बैंसी ज्यादा होने की आशंका है। तभी कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में भाजपा में अंतरकलह बढ़ेगी। अगले साल मार्च में होने वाले चुनाव में कांग्रेस को इसका लाभ मिल सकती है।


