भारत के चाहे बौद्धिक हों या व्यापारी सब चुनिंदा बयान देते हैं। अब जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बता दिया कि पेट्रोल, डीजल और गैस का संकट है और देश को इससे निपटने में सहयोग करना चाहिए तो सबकी जुबान खुल गई। कारोबारी भी बोलने लगे। अभी उदय कोटक ने कहा है कि देश को एनर्जी शॉक के लिए तैयार रहना चाहिए। सोचें, प्रधानमंत्री और भाजपा के लोग तो पांच राज्यों के चुनाव की वजह से एनर्जी शॉक को दो महीने से स्वीकार नहीं कर रहे थे। लेकिन उदय कोटक की क्या मजबूरी थी, जो उन्होंने यह बात पहले नहीं कही? वे देश को पहले भी बता सकते थे कि पश्चिम एशिया में संकट की वजह से देश को एनर्जी शॉक लगने वाला है। लेकिन वे चुप रहे क्योंकि हिप्पोक्रेसी इस देश के लोगों की पहली पहचान है।
बहरहाल, देश को एनर्जी शॉक लगने वाला है। यह बात अब खुल कर कहा जाने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से सादगी अपनाने की बात कही है और अब पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा है कि भारत की तेल कंपनियां कितने दिन तक घाटा उठा सकती हैं यह देखना होगा। इस बीच एक रिपोर्ट आई है, जिसमें कहा गया है कि अप्रैल से जून की तिमाही में भारत की पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों को इतना नुकसान होने वाला है, जितना उनको पिछले पूरे साल में मुनाफा नहीं हुआ था। उनको पिछले वित्त वर्ष में 70 हजार करोड़ रुपए का लाभ हुआ था और इन तीन महीनों का नुकसान उससे ज्यादा होगा। यह भी बताया गया है कि कंपनियां डीजल पर 42 रुपए लीटर और एक सिलेंडर पर साढ़े छह सौ रुपए से ज्यादा का नुकसान उठा रही हैं। इस तरह आधार भूमि तैयार कर दी गई। बस अब घोषणा होने वाली है। बहुत जल्दी पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के सिलेंडर के दाम बढ़ने वाले हैं।
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