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उत्तराखंड को लेकर भाजपा की गड़बड़ रणनीति

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड के हल्दवानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद हुई घटना पर अपने पुराने रुख को छोड़ चुकी है। पुराना रुख उस घटना की आलोचना करने का था। जब मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में यह मुद्दा उठाया कि उनकी सभा के बाद उस जगह का शुद्धिकरण किया गया और यह दलित अपमान है तो सदन के नेता जेपी नड्डा ने भी इसकी आलोचना की थी और कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। लेकिन उसके बाद भाजपा की रणनीति बदल गई है। उसने इसे सांप्रदायिक रंग दे दिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि सभा में सांप्रदायिक नारे लगे थे इसलिए शुद्धिकरण किया गया। भाजपा के लोगों ने आरोप लगाया कि सभा में अल्लाहू अकबर के नारे लग रहे थे, जबकि वह रामलीला मैदान है। यह बात भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने भी कही।

अब खड़गे ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख कर कहा है कि घटना के 24 दिन हो गए हैं और अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। उलटे कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खड़गे के अपमाना का मुद्दा उठाया तो उत्तराखंड में उन्हीं के खिलाफ एससी, एसटी एक्ट में केस दर्ज कर दिया गया। कांग्रेस के जानकार सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी एफआईआर दर्ज कराने के लिए उत्तराखंड जा सकते हैं। सात सितंबर को कांग्रेस ने प्रदर्शन का भी ऐलान किया है। दूसरी ओर भाजपा को लग रहा है कि चूंकि उत्तराखंड में 60 फीसदी के करीब ठाकुर और ब्राह्मण वोट हैं, जो पूरी तरह से भाजपा के साथ रहेंगे। इसलिए दलित वोट की परवाह करने की जरुरत नहीं है। गौरतलब है कि राज्य में दलित 20 फीसदी और मुस्लिम 15 फीसदी हैं। अगर दलित, मुस्लिम के साथ पिछड़े जुड़ते हैं और कुछ इलाकों में ब्राह्मण भाजपा का साथ छोड़ते हैं तो भाजपा को मुश्किल होगी। गौरतलब है कि भाजपा पिछले 10 साल से राजपूत मुख्यमंत्री बना कर रखा है। बगल के राज्य उत्तर प्रदेश में भी उत्तराखंड के ही ठाकुर सीएम हैं। हिमाचल में भी भाजपा की सरकार थी तो राजपूत सीएम था।

By NI Political Desk

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