भारतीय जनता पार्टी को ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ या उसकी मनमानी व्याख्या में मजा आता है। इससे उसका राजनीतिक एजेंडा भी सधता है। सोचें, आजादी के बाद से भारत 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता आया है। लेकिन नरेंद्र मोदी की सरकार ने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका दिवस मनाने की शुरुआत की। कुछ साल पहले ही यह परंपरा शुरू हुई है। देश के विभाजन और लाखों लोगों के विस्थापित होने या मार दिए जाने की याद में विभाजन विभीषिका दिवस मनाए जाने की शुरुआत हुई है। लेकिन वही भाजपा अब पश्चिम बंगाल में 20 जून के राज्य की स्थापना का दिवस मनाएगी। तभी सवाल उठ रहा है कि बंगाल में विभाजन विभीषिका दिवस किस दिन मनाया जाएगा?
ध्यान रहे बंगाल में विभाजन का फैसला 20 जून 1947 को हुआ था। विधानसभा ने राज्य के विभाजन की मंजूरी दी थी। उससे पहले बड़े दंगे हुए थे। हजारों लोग मारे गए थे और लाखों लोग विस्थापित हुए थे। यह सब इतिहास में दर्ज है। लेकिन अब 20 जून को राज्य की स्थापना का जश्न मनाया जाएगा। सोचें, कैसी विडम्बना है कि जिस दिन बंगाल का विभाजन हुआ उस दिन जश्न मनेगा और बंगाल के लोग भी 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका दिवस मनाएंगे! भाजपा यह भी कह रही है कि देश का विभाजन दुर्भाग्यपूर्ण है और इसके लिए कांग्रेस के नेता खास कर नेहरू जिम्मेदार हैं, गांधी और पटेल नहीं। लेकिन बंगाल का विभाजन अच्छा था क्योंकि उससे बंगाल को बचा लिया गया।


