भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन राज्यसभा सदस्य बन रहे हैं। बिहार में पांच सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होगा। नितिन नबीन एनडीए के नंबर एक उम्मीदवार हैं। इसलिए वे जीत कर उच्च सदन में आएंगे। उनको विधायी कामकाज का लंबा अनुभव है। वे 2006 से लगातार विधायक रहे हैं। राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद वे बांकीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा देंगे। कहा जा रहा है कि भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह प्रभारी संजय मयूख को उस सीट से चुनाव लड़ाया जाएगा। वे बिहार सरकार में मंत्री बनेंगे। गौरतलब है कि मयूख का विधान परिषद का कार्यकाल जून में समाप्त हो रहा है। बहरहाल, अब बड़ा सवाल यह है कि नितिन नबीन संसद में पहुंचेंगे और उच्च सदन में बैठेंगे तो वहां उनकी क्या स्थिति होगी?
भले उम्र और अनुभव में नितिन नबीन बाकी लोगों से कम हैं लेकिन उनका पद बहुत बड़ा है। वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जिनके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वे उनके भी बॉस हैं। हालांकि मोदी ने कभी यह बात जेपी नड्डा या अमित शाह के लिए नहीं कही थी कि वे उनके बॉस हैं। चूंकि उनको नितिन नबीन का कद बड़ा करना है इसलिए यह बात कही। सो, पहला सवाल तो यह है कि प्रधानमंत्री के बॉस नितिन नबीन कहां बैठेंगे? उनके लिए राज्यसभा में अगली पंक्ति में सीट बनानी होगी। सीट इसलिए बनानी होगी कि अगर किसी खास स्थिति में सभी बड़े नेता राज्यसभा में पहुंचें तो समस्या नहीं हो। लोकसभा में मोदी के अलावा राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी आगे बैठते हैं। दूसरा सवाल यह है कि क्या नितिन नबीन को सदन का नेता बनाया जा सकता है? ध्यान रहे अभी जेपी नड्डा सदन के नेता हैं लेकिन वे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री भी हैं। यानी दोहरी जिम्मेदारी है। दूसरी ओर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सदन में कांग्रेस के नेता हैं। सो, क्या भाजपा अपने अध्यक्ष को सदन का नेता बना सकती है?
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