राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

अखिलेश की भाईचारा रैली पर नजर

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भाईचारा समितियों का गठन करके खूब राजनीति की है। उन्होंने मुस्लिम और दलित का भाईचारा बनाने का प्रयास भी किया था और दलित व ब्राह्मण का भाईचारा बनाने का प्रयास भी किया था। मुस्लिम व दलित भाईचारे का तो उनको कोई खास फायदा नहीं हुआ लेकिन दलित और ब्राह्मण भाईचारे ने 2007 में उनकी पूर्ण बहुमत की सरकार बनवा दी थी। हालांकि यह भी है कि उसके बाद 2012 में वे जो हारीं तो आज तक जीत नहीं पाईं, बल्कि पार्टी समाप्त होने की ओर बढ़ गई। बहरहाल, अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भाईचारा रैली करने जा रहे हैं, जहां से वे चुनाव का आगाज करेंगे।

अखिलेश यादव 29 मार्च को दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा की दादरी में समाजवादी समानता भाईचारा रैली करेंगे। यह अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की शुरुआत है। इस रैली के जरिए अखिलेश अपने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के समीकरण का विस्तार करना चाहते हैं। उनको अंदाजा हो गया है कि शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी की नियमावली से अगड़ी जातियां खास कर ब्राह्मण भाजपा से बहुत नाराज हैं। इसलिए वे ब्राह्मणों को सम्मान देने की बात अब ज्यादा खुल कर करने लगे हैं। इस रैली के जरिए वे अलग अलग जातीय समूहों को एक साथ लाने और पार्टी से जोड़ने का प्रयास करेंगे। बताया जा रहा है कि इसके बाद राज्य के अलग अलग हिस्सों में इसी तरह की रैलियां करने की योजना है। यह भी मायावती की राजनीति का एक टेम्पलेट है। उन्होंने भी बिल्कुल जमीनी स्तर पर इश तरह की भाईचारा रैलियां की थीं। गांवों में कमेटियों की बैठकें होती थीं। अखिलेश भी ऐसा ही कुछ करेंगे।

By NI Political Desk

Get insights from the Nayaindia Political Desk, offering in-depth analysis, updates, and breaking news on Indian politics. From government policies to election coverage, we keep you informed on key political developments shaping the nation.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

10 − 2 =