भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर केंद्र सरकार के उन मंत्रियों में हैं, जिनकी खूब रील बनती है। उनकी आंखों से भी लेजर लाइट निकलने वाली रील्स बनती रहती हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि उनका सारा जोर यूरोप के देशों पर चलता है और सारी भाषणबाजी पाकिस्तान को लेकर होती है। चीन और अमेरिका या रूस के बारे में वे कम ही बोलते हैं या नहीं बोलते हैं। जब बोलते हैं तो अच्छा ही बोलते हैं। लेकिन जब यूरोप की बारी आती है तो वे कुछ भी कहते हैं। अक्सर बिना सिर पैर की बातें भी करते हैं। जैसे अभी उन्होंने फिनलैंड में एक संवाद के दौरान कहा कि यूरोप के देश ऐसे हथियार बेचते हैं, जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ होता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के हथियार कभी भी यूरोप के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होते हैं।
सवाल है कि क्या यही बात जयशंकर अमेरिका और चीन के बारे में कह सकते हैं? वे तो चीन के एक्सपर्ट माने जाते हैं, लंबे समय तक वहां भारत के राजनयिक रहे हैं। क्या वे चीन जाकर कह सकते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने चीन के हथियार का इस्तेमाल किया और चीन ने पाकिस्तान को रियल टाइम सूचनाएं दीं? क्या वे कह सकते हैं कि अमेरिका के लड़ाकू विमान एफ 16 से पाकिस्तान ने भारत के ऊपर हमला किया? क्या वे रूस जाकर कह सकते हैं कि रूस के बने एके 47 और एके 56 से आतंकवादियों ने कश्मीर से लेकर मुंबई तक पर हमला किया? वे ऐसी बातें कतई नहीं कह सकते हैं। लेकिन यूरोप हमेशा उनको आसान दिखता है। यूरोपीय देश भारत के प्रति सद्भाव दिखाते हैं और बदतमीजी नहीं करते हैं तो जयशंकर उन पर निशाना साधते रहते हैं।
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