झूठा-सा आत्म-गौरव?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के लिए यह आत्म-निरीक्षण का विषय होना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय मसलों में आज भारत की कोई भूमिका क्यों नहीं बची है? फिर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्यों अलग-थलग नजर आया? जब ये साफ हो गया कि प्रधानमंत्री भाग नहीं लेंगे, तो ईरान युद्ध पर बुलाई गई सर्वदलीय महज रस्म-अदायगी भर रह गई। ऐसी बैठकों की तभी अहमियत होती है, जब उनका मकसद उत्पन्न परिस्थिति पर पूरी पारदर्शिता बरतते हुए सभी पक्षों के बीच आम-सहमति बनाना होता है। ऐसा तभी हो सकता है, जब देश के शीर्ष नेता बैठक में उपस्थित रहें। और...