दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए छात्रों के ऐतिहासिक प्रदर्शन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्रों का दूसरा प्रदर्शन झारखंड में हुआ था। जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा में धांधली के खिलाफ छात्रों ने कई दिन तक भूख हड़ताल की थी और विधानसभा की ओर मार्च किया था। इस प्रदर्शन के बाद दोनों परीक्षाएं रद्द कर दी गई थीं। गौरतलब है कि झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन यानी जीएसएससी ने जो सीजीएल की परीक्षा कराई थी, उसमें 23 सौ लोगों का चयन हुआ था, जो परीक्षा रद्द होने के बाद हाई कोर्ट पहुंचे थे। अब हाई कोर्ट ने उस परीक्षा को रद्द करने के सरकार को फैसले को खारिज कर दिया है।
इसका अर्थ है कि जीएसएससी की सीजीएल परीक्षा में चुने गए और कई साल से नौकरी कर रहे लोगों की नौकरी बची रहेगी। तभी सवाल है कि क्या छात्र अब फिर सड़क पर उतरेंगे? संभव है कि छात्रों के दबाव में सरकार सुप्रीम कोर्ट जाए। लेकिन अगर परीक्षा रद्द नहीं होती है तो क्या छात्र फिर से आंदोलन में उतरेंगे? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि जंतर मंतर के बाद कॉकरोच जनता पार्टी को भी अपनी ताकत दिखानी थी। उस समय उस पर सवाल उठे थे कि रांची में हो रहे आंदोलन में उसके नेता शामिल नहीं हो रहे हैं। रांची के आंदोलन में भाजपा समर्थक शामिल थे। तभी हो सकता है कि भाजपा फिर इसे हवा दे और सीजेपी इससे दूर रहे।
Leave a comment
You must be logged in to post a comment.



