यह गंभीर सवाल है क्योंकि भारत सरकार ने कह दिया है कि पासपोर्ट नागरिकता प्रमाणित करने का दस्तावेज नहीं है। विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि पासपोर्ट सिर्फ एक यात्रा दस्तावेज है उसे नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता है। सवाल है कि भारत के पासपोर्ट पर हर व्यक्ति की नागरिकता के आगे भारतीय लिखा होता है, उसका क्या मतलब है? क्या बिना किसी जांच पड़ताल के मान लिया जाता है कि संबंधित व्यक्ति भारतीय है? इससे पहले कहा जा चुका है कि आधार सिर्फ पहचान के लिए है वह नागरिकता प्रमाणित करने का दस्तावेज नहीं है। इसी तरह मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड के बारे में भी कहा जा चुका है कि यह नागरिकता प्रमाणित करने का दस्तावेज नहीं है। पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस तो कभी भी नागरिकता का दस्तावेज नहीं हैं और न संपत्ति के कागजातों से नागरिकता प्रमाणित हो सकती है।
तभी सवाल है कि किसी एक दस्तावेज या दस्तावेजों के समूह के आधार पर किसी की नागरिकता प्रमाणित होगी? और अगर अभी के किसी भी दस्तावेज के आधार पर नागरिकता प्रमाणित नहीं होती है तो क्या लोगों को नागरिकता का नया दस्तावेज बनवाना होगा? पूरा देश जिस तरह से आधार कार्ड बनवाने के लिए महीनों, बरसों तक लाइन में लगा उसी तरह नागरिकता कार्ड बनवाने के लिए भी लाइन में लगेगा? लेकिन फिर सवाल है कि उसके लिए क्या करना होगा? किन दस्तावेजों के आधार पर नागरिकता कार्ड बनेगा? अभी तो आधार और पासपोर्ट के आधार पर कोई भी कार्ड बनवाया जा सकता है या कोई भी सुविधा हासिल की जा सकती है। लेकिन अब लगता है कि नागरिकता के लिए एक या दो या एक दर्जन दस्तावेजों से कुछ नहीं होने वाला है। लोगों को अपने सात पुश्तों की जानकारी लेकर लाइन में लगना होगा, तब नागिरकता प्रमाणित होगी। आखिर भारत वर्ष की नागरिकता का मामला है, कोई मजाक है!


