nayaindia Arvind Kejriwal केजरीवाल खुद क्यों नहीं संभालते मंत्रालय?
दिल्ली

केजरीवाल खुद क्यों नहीं संभालते मंत्रालय?

ByNI Political,
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दिल्ली सरकार के दो मंत्रियों का इस्तीफा हो गया है। एक मंत्री तो नौ महीने से जेल में थे और बिना विभाग के मंत्री थे। उनसे इस्तीफा लेने की जरूरत नहीं समझी गई थी। उनके जेल जाने के बाद उनके सारे विभाग मनीष सिसोदिया को सौंप दिए गए थे। अब सिसोदिया ने भी इस्तीफा दे दिया है तो उनके पास जितने विभाग थे वो दो मंत्रियों- कैलाश गहलोत और राजकुमार आनंद के बीच बांटा गया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पास खुद कोई विभाग नहीं है और जब संकट की स्थिति में दो मंत्रियों ने इस्तीफा दिया तब भी उनके विभाग अपने पास लेकर काम करने की बजाय मुख्यमंत्री ने दो मंत्रियों को अतिरिक्त प्रभार दे दिया।

सवाल है कि केजरीवाल अपने पास कोई मंत्रालय क्यों नहीं रखना चाहते हैं? सोचें, दिल्ली सरकार में मुख्यमंत्री सहित कुल सात ही मंत्री हो सकते हैं। इसलिए यह ज्यादा जरूरी होता है कि सरकार के प्रभावी संचालन के लिए कामकाज का संतुलित बंटवारा हो। लेकिन दिल्ली सरकार में जितना असंतुलित बंटवारा था वैसा कहीं देखने को नहीं मिलता है। मुख्यमंत्री ने खुद अपने पास कोई विभाग नहीं रखा था तो सिसोदिया के पास दिल्ली सरकार के 33 में से 18 मंत्रालयों की जिम्मेदारी थी।

इनमें से कुछ विभाग मुख्यमंत्री अपने पास रख सकते थे लेकिन उन्होंने कोई मंत्रालय अपने पास नहीं रखा। दूसरे राज्यों में मुख्यमंत्री ज्यादा महत्व के और संवेदनशील विभाग अपने पास रखते हैं। पिछले दिनों ही राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी सरकार का बजट पेश किया क्योंकि वित्त मंत्रालय उनके पास है। सवाल है कि केजरीवाल की इस जिद का क्या मतलब है? सरकार का कामकाज प्रभावित होने के वास्तविक कारणों के बावजूद उन्होंने कोई मंत्रालय अपने पास नहीं रखा। यहां तक कि सिसोदिया के इस्तीफे के बाद अस्थायी रूप से भी कोई मंत्रालय अपने पास नहीं लिया। अभी बजट सत्र होना है। कायदे से मुख्यमंत्री को बजट पेश करना चाहिए लेकिन वह काम भी दूसरे मंत्री करेंगे।

कहीं ऐसा तो नहीं है कि जिस कारण से सत्येंद्र जैन जेल गए हैं या मनीष सिसोदिया जेल भेजे गए हैं, उससे बचने के लिए केजरीवाल ने अपने पास कोई मंत्रालय नहीं रखा है? वे भारत सरकार के अधिकारी रहे हैं और उसमें भी आयकर विभाग के। उनको किसी कागज पर दस्तखत करने या किसी कंपनी का निदेशक होने का मतलब पता है। वे जानते हैं कि गड़बड़ी होने की स्थिति में पकड़ा वही जाएगा, जो दस्तखत करेगा। संभवतः इसलिए वे किसी मंत्रालय का काम अपने पास नहीं रखते हैं। फिर सवाल यह है कि जब वे कट्टर ईमानदार लोगों की सरकार चला रहे हैं तब अपने पास मंत्रालय रखने और फाइल्स पर दस्तखत करने में क्या दिक्कत है? जब सारे काम जनता के हित में हो रहे हैं और एक एक पाई का हिसाब सही है तो उनको मंत्रालय अपने पास रखने और उनका बेहतर संचालन करने से नहीं डरना चाहिए। अगर मंत्री बनने में खतरा है, केंद्र सरकार का डर है तब भी दूसरे नेताओं को बलि का बकरा बनाने से पहले उनको खुद आगे आना चाहिए।

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