कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा समाप्त हुए 10 दिन हो गए। राहुल गांधी यात्रा के मोड से बाहर आ गए हैं। हालांकि उन्होंने दाढ़ी अब भी नहीं कटवाई है और मीडिया से लेकर राजनीतिक बिरादरी में यह सवाल पूछा जा रहा है कि वे कब दाढ़ी कटवाएंगे। लेकिन उससे ज्यादा जरूरी यह सवाल है कि वे पूर्वोत्तर के दौरे पर कब जाएंगे? ध्यान रहे पूर्वोत्तर के राज्य उनकी यात्रा का हिस्सा नहीं थे और तीन राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। त्रिपुरा में तो 16 फरवरी को ही मतदान है, जिसके लिए 14 फरवरी को प्रचार बंद हो जाएगा। यानी त्रिपुरा में प्रचार के लिए बस पांच दिन बचे हैं।
मेघालय और नगालैंड में 27 फरवरी को चुनाव हैं। हालांकि यह भी चुनाव आयोग पर बड़ा सवाल है कि तीनों राज्यों का चुनाव एक साथ क्यों नहीं कराया गया या अंतर नौ दिन का क्यों रखा गया पर उन दोनों राज्यों में पार्टियों के पास प्रचार के लिए समय है। अगर राहुल गांधी संसद के बजट सत्र का पहला चरण पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं तो यह बहुत समझदारी की बात नहीं है। आखिर बजट सत्र के बीच भाजपा के तमाम बड़े नेता और केंद्रीय मंत्री प्रचार करने त्रिपुरा गए। संसद के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह प्रचार करने पूर्वोत्तर गए।
अगर राहुल संसद छोड़ कर नहीं जाना चाहते थे तब भी उनके पास शनिवार और रविवार का समय था, वे रैली करने जा सकते थे। ध्यान रहे त्रिपुरा में कांग्रेस और लेफ्ट एलांयस के लिए काफी अच्छी संभावना है। मेघालय में भी पार्टी को अपनी खोई हुई स्थिति वापस हासिल करनी है। और यह तभी होगा, जब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा वहां प्रचार करेंगे, मेहनत करेंगे। अगर छोटा राज्य समझ कर कांग्रेस इनकी अनदेखी कर रही है तो अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रही है।
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