झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रदेश की अपनी सरकार बचाने के लिए क्या भाजपा के साथ किसी तरह का समझौता किया है? प्रदेश की राजनीति में भाजपा और जेएमएम के बीच घमासान छिड़ा हुआ है। पिछले दो साल में कई बार ऐसा लगा कि कांग्रेस टूट रही है और सरकार गिरने वाली है लेकिन सरकार बची रही। कई बार लगा कि हेमंत सोरेन की विधानसभा की सदस्यता जाने वाली है और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई में उनकी गिरफ्तारी होनी है लेकिन न सदस्यता गई और न गिरफ्तारी हुई। सोचें, खुद हेमंत सोरेन मान रहे थे कि गिरफ्तारी होगी, तभी उन्होंने विधानसभा में कहा था कि जेल में रह कर भी वे भाजपा को हरा देंगे। राज्यपाल रमेश बैस ने पिछले साल दिवाली के समय कहा था कि राज्य में एटम बम फूट सकता है। लेकिन एटम बम भी फुस्स हो गया।
तभी यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या भाजपा के साथ किसी तरह का समझौता हुआ है? हेमंत सोरेन इस हफ्ते दिल्ली आए और रविवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के बेटे के शादी समारोह में शामिल हुए। इसकी फोटो खूब वायरल हुई। इसके बाद वे केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह से मिले और उसकी भी फोटो जारी हुई। फिर वे गैर कांग्रेसी मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहे घनघोर कांग्रेस विरोधी नेता अरविंद केजरीवाल से मिले। सोचें, राज्य में कांग्रेस के 17 विधायकों के दम पर हेमंत सोरेन की सरकार चल रही है फिर भी वे कांग्रेस की बजाय कांग्रेस विरोधियों से मेल मुलाकात बढ़ा रहे हैं।
कहा जा रहा है कि हेमंत के ऊपर कांग्रेस से दूरी बनाने का दबाव है। वे इसी शर्त पर बचे हुए हैं कि कांग्रेस से दूरी बनाएंगे और अगले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ नहीं लड़ेंगे। अगर लोकसभा में कांग्रेस और जेएमएम का तालमेल नहीं होता है तो भाजपा के लिए राज्य की 14 में से अपनी जीती हुई 12 सीटें बचाना आसान हो जाएगा। वैसे भी इस बार जेएमएम चार सीट पर लड़ कर संतोष नहीं करने वाली है। वह कांग्रेस के बराबर सीट लड़ना चाहेगी या उसे कम सीट देगी। इस पर तालमेल टूट सकता है। इसका सीधा फायदा भाजपा को होगा। ध्यान रहे भाजपा की अब पहली चिंता 2024 को लोकसभा चुनाव है। राज्य विधानसभा के बारे में उसके बाद में सोचा जाएगा।
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