झारखंड में कांग्रेस की कलह चलती रहेगी

विधायकों की दिल्ली यात्रा पूरी तरह से सुनियोजित थी, इसका पता तब चला, जब एक विधायक की यात्रा की टिकट और पीएनआर चेक किया गया। पता चला कि एक पीएनआर पर तीन या चार विधायकों की टिकट हुई थी। इसके बाद प्रशासन की ओर से सरकार को अलर्ट किया गया और सरकार ने कांग्रेस नेतृत्व को बताया।

गलतियों से कब सीखेगी कांग्रेस?

परिवारवाद के विष-आलिंगन ने कांग्रेस को सात दशकों से जकड़ा हुआ है। इस दल में नेतृत्व की क्षमता केवल उतनी है, जितनी गांधी-नेहरू परिवार के पास उपलब्ध है। उनकी पसंद-नापसंद से पार्टी की कार्यप्रणाली प्रभावित है। कई राज्यों में कांग्रेस का अंतर्कलह- इसका उदाहरण है। सच तो यह भी है कि गत कई वर्षों से कांग्रेस उस कॉरपोरेट उद्यम की भांति हो गई है, जहां पैसे से सत्ता और सत्ता से पैसा अर्जित करना- एकमात्र उद्देश्य होता है।

कांग्रेस को राज्यों में झगड़ा सुलझाना है

congress political crisis  : कांग्रेस पार्टी को कई राज्यों में अपना झगड़ा सुलझाना है। चुनाव वाले कम से कम दो राज्यों में कांग्रेस संगठन में घमासान छिड़ा है। पंजाब और उत्तराखंड में कांग्रेस के नेता आपस में लड़ रहे हैं। हरियाणा में पार्टी के नेता आपस में लड़ रहे हैं तो केरल में अलग झगड़ा छिड़ा हुआ है। झारखंड का झगड़ा हाल ही में दिल्ली तक पहुंचा था। वहां पार्टी जेएमएम के साथ सरकार में है पर पता नहीं किस मजबूरी में कांग्रेस अभी तक नया अध्यक्ष नहीं नियुक्त कर पाई है। बुजुर्ग नेता रामेश्वर उरांव राज्य सरकार में मंत्री भी हैं और प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। कांग्रेस के युवा नेताओं को न सरकार में जगह है और न संगठन में। पार्टी यह विवाद जल्दी से जल्दी सुलझाना होगा नहीं तो अगले साल होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कुछ खेल हो सकता है। यह भी पढ़ें: दिसंबर से पहले ही सबको वैक्सीन लगेगी! यह भी पढ़ें: आप के रास्ते पर तृणमूल कांग्रेस congress political crisis : उत्तराखंड में इंदिरा हृदयेश के निधन के बाद नेता विपक्ष का पद खाली है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत चाहते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को नेता विपक्ष बना दिया जाए। लेकिन प्रीतम… Continue reading कांग्रेस को राज्यों में झगड़ा सुलझाना है

Assam में कांग्रेस को बड़ा झटका, विधायक रूपज्योति कुर्मी ने दिया इस्तीफा, BJP में हो सकते हैं शामिल

गुवाहाटी | देश में लगता है कि अभी राजनीतिक बवाल मचा हुआ है। राजस्थान-बिहार के अलावा कई राज्यों में सियासी घमासान चल रहा है। अब असम से राजनीति की बड़ी खबर सामने आई है। यहां कांग्रेस को बड़ झटका लगा है। असम से चार बार के विधायक रूपज्योति कुर्मी (Rupjyoti Kurmi) ने आज कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। जिसके बाद अब रूपज्योति कुर्मी के जल्द ही BJP में शामिल होने की संभावना जताई गई है। कुर्मी ने असम विधानसभा (Assam Vidhan Sabha) की सदस्यता से भी इस्तीफा सौंप दिया है। उन्होंने असम विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी (Biswajit Daimary) को अपना इस्तीफा सौंपा। जिसके बाद असम में भी राजनीति गरमाने लगी है। ये भी पढ़ें:- ‘राजे’ समर्थकों का बिगुल, वसुंधरा ही सर्वमान्य, राजस्थान भाजपा में नहीं कोई दूसरा विकल्प राहुल गांधी पर साधा निशाना कांग्रेस पार्टी से नाराज चल रहे असम में जोरहाट जिले के मरियानी निर्वाचन क्षेत्र के विधायक रूपज्योति कुर्मी ने इस्तीफा देते हुए कहा कि वह कांग्रेस छोड़ रहे हैं क्योंकि पार्टी नेतृत्व युवा नेताओं की आवाज की अनदेखी करता है। उन्होंने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पर निशाना साधते हुए कहा, राहुल गांधी नेतृत्व करने में असमर्थ हैं। अगर वह शीर्ष पर रहेंगे तो पार्टी आगे नहीं बढ़… Continue reading Assam में कांग्रेस को बड़ा झटका, विधायक रूपज्योति कुर्मी ने दिया इस्तीफा, BJP में हो सकते हैं शामिल

राहुल गांधी होते कौन हैं मना करने वाले?

कांग्रेस का अध्यक्ष पद संभालने की लियाक़त रखने वाले कई चेहरे हैं। प्रियंका गांधी हैं। कमलनाथ हैं। पी. चिदंबरम हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे हैं। दिग्विजय सिंह हैं। अशोक गहलोत हैं। उम्र पर न जाएं तो शिवराज पाटिल हैं, सुशील कुमार शिंदे हैं और आप को नागवार न गुज़रें तो आनंद शर्मा, मुकुल वासनिक, शशि थरूर भी हैं। राहुल-सोनिया जिसके लिए इशारा कर देंगे, वह मुखिया हो जाएगा। लेकिन अगर मोशा-भाजपा को वनवास देना है तो अंततः राहुल को ही आगे आना होगा। नरेंद्र भाई का विकल्प राहुल और प्रियंका में से ही कोई हो सकता है। राहुल को यह समझना होगा कि कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ कर उन्होंने पार्टी का कितना बड़ा नुक़सान किया है? उन्हें यह भी समझना होगा कि यह ज़िम्मेदारी संभालने में देरी कर के अब वे पूरे विपक्ष का कितना बड़ा नुक़सान कर रहे हैं? आज अगर समूचे विपक्ष की कोई सकल-शक़्ल नहीं बन पा रही है तो इसलिए कि कांग्रेस अंतरिम-नेतृत्व के सहारे चल रही है। कल राजीव गांधी की शहादत के तीस साल पूरे हो गए और मैं सोचता रहा कि आज अगर वे होते तो, भले ही अब 77 साल के होते, मगर उनके होते, और कुछ भी होता, कांग्रेस का यह हाल… Continue reading राहुल गांधी होते कौन हैं मना करने वाले?

नई नियुक्ति या प्रियंका होंगी संकटमोचन?

कांग्रेस कार्य समिति की बैठक वैसे तो पांच राज्यों के चुनाव नतीजों की समीक्षा के लिए हुई थी और उसके अलावा चर्चा का केंद्र कोरोना वायरस की महामारी रही। इसके साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव टालने का फैसला किया गया। लेकिन कार्य समिति की बैठक के बाद से ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि क्या कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की सहायता के लिए किसी को नियुक्त किया जाएगा। कांग्रेस के कई नेता इसकी अटकलें लगा रहे हैं और मीडिया में इसकी खबर भी आ रही है। यह भी पढ़ें: यूपी से दूर हो रही हैं प्रियंका! बताया जा रह है कि कार्य समिति की बैठक में प्रमोद तिवारी ने यह मुद्दा उठाया और कहा कि अहमद पटेल के निधन के बाद से कांग्रेस के अंदर तालमेल बैठाने वाले नेता की कमी है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिस नेता को प्रशासनिक अनुभव हो और पार्टी के सभी नेताओं के साथ जुड़ाव हो उसे जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। उसके बाद से यह कयास लगाया जाने लगा है कि उनका इशारा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की ओर है। तभी सवाल है कि क्या दिग्विजय सिंह या किसी और को कांग्रेस अध्यक्ष का… Continue reading नई नियुक्ति या प्रियंका होंगी संकटमोचन?

कांग्रेस अब विपक्ष से भी जा रही है

कांग्रेस पार्टी का संकट एक नहीं है, बल्कि कई संकट हैं। कांग्रेस राज्यों में सरकार गंवा रही है या लगातार चुनाव लड़ते हुए भी जीत नहीं पा रही है यह एक संकट है। दूसरा संकट यह है कि कांग्रेस पार्टी अब राज्यों में विपक्ष की हैसियत भी गंवा रही है। वह एक के बाद एक राज्यों से सत्ता से भी बाहर हो रही है और उसे मुख्य विपक्षी दल की हैसियत भी नहीं मिल रही है। केंद्र में पिछले दो चुनाव से यही स्थिति है। कांग्रेस ने 2014 में सरकार तो गंवाई ही उसके बाद से उसे लोकसभा में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा भी नहीं मिला। हां, यह संतोष जरूर है कि वह विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है। लेकिन कई राज्यों में तो वह विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी भी नहीं बन पा रही है। यह भी पढ़ें: बंगाल का तमाशा, ध्यान भटकाने की साजिश यह भी पढ़ें: बंगाल में भाजपा की समानांतर सरकार दिल्ली से इसकी शुरुआत हुई थी। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के सत्ता में आने के साथ ही कांग्रेस ने सत्ता तो गंवाई ही मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा भी गंवा दिया और फिर जीरो पर आ गई। अब आम आदमी पार्टी की सत्ता है… Continue reading कांग्रेस अब विपक्ष से भी जा रही है

राहुल को कांग्रेसियों से भी फ्रंटफुट पर खेलना होगा

राहुल को इस सीडब्ल्यूसी मीटिंग में कहना चाहिए था कि आप चुनाव करवा ही लो। आपने कोरोना के समय ही चुनाव की मांग की थी तो अब भी वही स्थिति है। अगर कोरोना और उससे पीड़ित जनता और मदद कर रहे कांग्रेसी आपकी चिन्ताओं में होते तो आप इस तरह की मांग ही नहीं करते। मुद्दा नहीं बनाते। और अब जब सब कर लिया तो फिर चुनाव करवा भी लो। कोरोना को देखते हुए काम कर रहा कोई कांग्रेसी तो नामांकन नहीं भरेगा। आप अपनी तरफ से तय करके जिसे चाहो नामांकन भरवा दो। चुनाव टालने से पहले राहुल अगर एक बार यह कह देते तो देखते कि बाजी किस तरह पलटती है! राहुल गांधी को राजनीति नहीं आती है। यदि आती होती तो वे कहते कि कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव करवाना चाहिए। आज कोरोना का वजह से चुनाव स्थगित हुए हैं। तो क्या जब बगावत पर उतारू 23 कांग्रेसी नेता कांग्रेस संगठन के चुनावों की मांग कर रहे थे तब स्थिति सामान्य थी? पिछले साल उस समय भी कोरोना का प्रकोप ऐसा ही था जब कांग्रेस नेताओं ने एक गुट बनाकर सोनिया गांधी को पत्र लिखा था। और ज्यादा संगीन बात यह थी कि जिस समय पत्र लिखा गया… Continue reading राहुल को कांग्रेसियों से भी फ्रंटफुट पर खेलना होगा

अनुकंपा वाले नेताओं की बगावत

कांग्रेस पार्टी में हर पद पर चुनाव की मांग वाली चिट्ठी लिखने वाले 23 नेताओं में भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी शामिल थे। पिछले दिनों वे कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद से मिलने गए।

सिब्बल के विरोध से क्या होगा?

कांग्रेस पार्टी में परिवार के प्रति कुछ ज्यादा निष्ठा दिखाने वाले नेताओं ने पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के ऊपर हमला शुरू कर दिया है

कमलनाथ की क्या भूमिका होगी?

हो सकता है कि इसमें थोड़ा समय लगे और जनवरी-फरवरी की बजाय यह काम मई-जून में हो पर यह तय है कि कांग्रेस संगठन में बदलाव होगा। राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष पद की कमान संभालेंगे।

कांग्रेसः नेता और नीति ?

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन 23 नेताओं की बैठक आखिरकार बुला ही ली, जिन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व और संगठन के बारे में उन्हें एक अप्रिय पत्र लिख भेजा था

कांग्रेस में कुछ लोग बैठे हैं बागी होने को

कांग्रेस पार्टी में कुछ नेता ऐसा हैं, जो हमेशा बागी होने के लिए बैठे रहते हैं। वे मौके का इंतजार करते हैं। कहां पार्टी हारे तो नेतृत्व पर सवाल उठाया जाए। कांग्रेस में पहले ऐसा नहीं होता था।

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