congress political crisis

  • लड़ाने वाले खुद लड़ रहे खंदक की लड़ाई

    भोपाल। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहते दिग्विजय सिंह कमलनाथ और कांतिलाल भूरिया कभी पूरे प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में सभी सीटों पर प्रत्याशियों को लड़ाते थे वक्त का तकाजा है कि इस समय दोनों नेता अपने-अपने क्षेत्र में खंदक की लड़ाई लड़ रहे हैं। दरअसल पूरे देश के साथ-साथ प्रदेश में भी कांग्रेस एक ऐसे संकट के दौर से गुजर रही है जब उसके नेता एक-एक करके पार्टी छोड़कर जा रहे हैं प्रदेश कांग्रेस की कमान युवा प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार संभाल रहे हैं पिछले तीन दशक से दिग्विजय सिंह और...

  • कांग्रेस को कमजोर बताना विपक्ष के लिए भी घातक

    भारतीय जनता पार्टी तो मुख्य विपक्षी कांग्रेस को दुश्मन नंबर एक मान कर उसे खत्म करने की राजनीति कर ही रही है लेकिन आश्चर्यजनक रूप से कांग्रेस की सहयोगी होने का भ्रम बनाए बैठीं प्रादेशिक पार्टियां भी कांग्रेस को कमजोर करने या आम जनता की नजर मे उसे कमजोर बताने की रणनीति पर काम कर रही हैं। प्रधानमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया था और इस पर अमल करते हुए वे इतना आगे निकल कर गए हैं कि पूरी भाजपा को ही कांग्रेस युक्त बना डाल रहे हैं। यह भी पढ़ें: भाजपा के राष्ट्रीय...

  • गुलाम नबी, कमलनाथ जैसों का क्या ईमान-धर्म?

    अहसानफरामोश तो अहसानफरामोश ही होता है। जिस कांग्रेस ने सब कुछ दिया, या इसको जम्मू कश्मीर के कांग्रेसी ऐसे भी कहते हैं कि क्या नहीं दिया तो जबउन्होंने कांग्रेस को नहीं बख्शा तो फारुख अब्दुल्ला को स्पेयर करने कासवाल ही नहीं!...कमलनाथ अकेले नहीं हैं। वे अब जाएं या भाजपा द्वारा न लिएजाएं उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्होंने अपना अवसरवादी चेहरा दिखादिया। इतना तो 2019 में राहुल गांधी को नहीं मनाया गया था जितना कमलनाथ को कांग्रेस नेता ने अभी मना रहे हैं।कांग्रेसियों ने सारे दावे कर दिए है कि वे नहीं जा रहे। मगर उनके श्रीमुख से अभी...

  • कांग्रेस में जिन्हे सब कुछ मिला वे छोड़ रहे!

    आमतौर पर किसी नेता के पार्टी से नाराजगी का कारण यह होता है कि पार्टी ने उसे कुछ नहीं दिया। लेकिन कांग्रेस में इसका उलटा होता है। कांग्रेस में जिन लोगों को सब कुछ मिलता है वे ही नाराज होते हैं। पिछले एक दशक में यानी जब से केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार बनी है तब से कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं की सूची पर नजर डालेंगे तो दिखाई देगा कि पार्टी ने जिन लोगों को मुख्यमंत्री बनाया, केंद्र में मंत्री बनाया और संगठन में बड़े पद दिए उन लोगों ने ही पार्टी छोड़ी। इनमें अनेक लोग ऐसे...

  • बिन सत्ता के नेता कैसे रहे कांग्रेस में?

    जब भी कांग्रेस का कोई नेता पार्टी छोड़ता है तो उसे नए और पुराने की बाइनरी में देखा जाता है। इसके अलावा दूसरे पहलुओं पर देखने की जहमत नहीं उठाई जाती है। पीढ़ियों के संघर्ष की बाइनरी चूंकि बहुत सुविधाजनक है इसलिए इस पहलू से देख कर मामले को हर बार रफा-दफा कर दिया जाता है। इसमें एक फायदा यह भी है कि इस पहलू से देखने पर राहुल गांधी के ऊपर निशाना साधना आसान हो जाता है, जो भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के बहुत अनुकूल होता है। ऐसे नेता, जिनका कांग्रेस से मोहभंग नहीं हुआ है या वैचारिक-राजनीतिक...

  • सब कुछ सीखा हमने… न सीखी… सच है… हम है…!

    जब भी कांग्रेस का कोई नेता पार्टी छोड़ता है तो उसे नए और पुराने की बाइनरी में देखा जाता है। इसके अलावा दूसरे पहलुओं पर देखने की जहमत नहीं उठाई जाती है। पीढ़ियों के संघर्ष की बाइनरी चूंकि बहुत सुविधाजनक है इसलिए इस पहलू से देख कर मामले को हर बार रफा-दफा कर दिया जाता है। इसमें एक फायदा यह भी है कि इस पहलू से देखने पर राहुल गांधी के ऊपर निशाना साधना आसान हो जाता है, जो भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के बहुत अनुकूल होता है। ऐसे नेता, जिनका कांग्रेस से मोहभंग नहीं हुआ है या वैचारिक-राजनीतिक...

  • कांग्रेस को सब नसीहत दे रहे हैं

    जब भी कांग्रेस का कोई नेता पार्टी छोड़ता है तो उसे नए और पुराने की बाइनरी में देखा जाता है। इसके अलावा दूसरे पहलुओं पर देखने की जहमत नहीं उठाई जाती है। पीढ़ियों के संघर्ष की बाइनरी चूंकि बहुत सुविधाजनक है इसलिए इस पहलू से देख कर मामले को हर बार रफा-दफा कर दिया जाता है। इसमें एक फायदा यह भी है कि इस पहलू से देखने पर राहुल गांधी के ऊपर निशाना साधना आसान हो जाता है, जो भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के बहुत अनुकूल होता है। ऐसे नेता, जिनका कांग्रेस से मोहभंग नहीं हुआ है या वैचारिक-राजनीतिक...

  • कांग्रेस हमेशा गलत क्यों?

    जब भी कांग्रेस का कोई नेता पार्टी छोड़ता है तो उसे नए और पुराने की बाइनरी में देखा जाता है। इसके अलावा दूसरे पहलुओं पर देखने की जहमत नहीं उठाई जाती है। पीढ़ियों के संघर्ष की बाइनरी चूंकि बहुत सुविधाजनक है इसलिए इस पहलू से देख कर मामले को हर बार रफा-दफा कर दिया जाता है। इसमें एक फायदा यह भी है कि इस पहलू से देखने पर राहुल गांधी के ऊपर निशाना साधना आसान हो जाता है, जो भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के बहुत अनुकूल होता है। ऐसे नेता, जिनका कांग्रेस से मोहभंग नहीं हुआ है या वैचारिक-राजनीतिक...

  • कांग्रेस चुनाव लड़ना सचमुच भूल गई है!

    जब भी कांग्रेस का कोई नेता पार्टी छोड़ता है तो उसे नए और पुराने की बाइनरी में देखा जाता है। इसके अलावा दूसरे पहलुओं पर देखने की जहमत नहीं उठाई जाती है। पीढ़ियों के संघर्ष की बाइनरी चूंकि बहुत सुविधाजनक है इसलिए इस पहलू से देख कर मामले को हर बार रफा-दफा कर दिया जाता है। इसमें एक फायदा यह भी है कि इस पहलू से देखने पर राहुल गांधी के ऊपर निशाना साधना आसान हो जाता है, जो भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के बहुत अनुकूल होता है। ऐसे नेता, जिनका कांग्रेस से मोहभंग नहीं हुआ है या वैचारिक-राजनीतिक...

  • अराजनीतिक सलाहकारों,यू ट्यूबर्स आंकडेबाजों से डूब रही हैं कांग्रेस

    जब भी कांग्रेस का कोई नेता पार्टी छोड़ता है तो उसे नए और पुराने की बाइनरी में देखा जाता है। इसके अलावा दूसरे पहलुओं पर देखने की जहमत नहीं उठाई जाती है। पीढ़ियों के संघर्ष की बाइनरी चूंकि बहुत सुविधाजनक है इसलिए इस पहलू से देख कर मामले को हर बार रफा-दफा कर दिया जाता है। इसमें एक फायदा यह भी है कि इस पहलू से देखने पर राहुल गांधी के ऊपर निशाना साधना आसान हो जाता है, जो भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के बहुत अनुकूल होता है। ऐसे नेता, जिनका कांग्रेस से मोहभंग नहीं हुआ है या वैचारिक-राजनीतिक...

  • कांग्रेस बैठाती है मैनेजरों को सिर पर!

    जब भी कांग्रेस का कोई नेता पार्टी छोड़ता है तो उसे नए और पुराने की बाइनरी में देखा जाता है। इसके अलावा दूसरे पहलुओं पर देखने की जहमत नहीं उठाई जाती है। पीढ़ियों के संघर्ष की बाइनरी चूंकि बहुत सुविधाजनक है इसलिए इस पहलू से देख कर मामले को हर बार रफा-दफा कर दिया जाता है। इसमें एक फायदा यह भी है कि इस पहलू से देखने पर राहुल गांधी के ऊपर निशाना साधना आसान हो जाता है, जो भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के बहुत अनुकूल होता है। ऐसे नेता, जिनका कांग्रेस से मोहभंग नहीं हुआ है या वैचारिक-राजनीतिक...

  • कांग्रेस का विभाजित नेतृत्व

    जब भी कांग्रेस का कोई नेता पार्टी छोड़ता है तो उसे नए और पुराने की बाइनरी में देखा जाता है। इसके अलावा दूसरे पहलुओं पर देखने की जहमत नहीं उठाई जाती है। पीढ़ियों के संघर्ष की बाइनरी चूंकि बहुत सुविधाजनक है इसलिए इस पहलू से देख कर मामले को हर बार रफा-दफा कर दिया जाता है। इसमें एक फायदा यह भी है कि इस पहलू से देखने पर राहुल गांधी के ऊपर निशाना साधना आसान हो जाता है, जो भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के बहुत अनुकूल होता है। ऐसे नेता, जिनका कांग्रेस से मोहभंग नहीं हुआ है या वैचारिक-राजनीतिक...

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